China CPEC Project In Kashmir Shaksgam Valley: चीन ने जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir ) की शक्सगाम घाटी इलाके को अपना बताया है। चीन अपनी CPEC प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान तक सड़क बना रहा है, जो इस इलाके से गुजर रही है। भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आलोचना करते हुए कहा था कि यह भारतीय क्षेत्र है और उसके पास अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है।

अभ चीन ने शक्सगाम घाटी को अपना हिस्सा बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग (Mao Ning )ने कहा कि शक्सगाम घाटी चीन का है और इस इलाके में बुनियादी ढांचा परियोजना बिलकुल उचित है। उन्होंने सीपीईसी पर भारत की आपत्तियों पर भी बयान दिया।

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग (Mao Ning ) ने सोमवार को कहा कि जिस इलाके को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वह चीन का ही हिस्सा है। अपने इलाके में इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना चीन का अधिकार है और इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सबसे पहले तो जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैं। माओ ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की गई थी। उन्होंने कहा कि यह संप्रभु देशों के रूप में चीन और पाकिस्तान का अधिकार है।

भारत की CPEC की आलोचना पर भी दिया जवाब

सीपीईसी को लेकर भारत की ओर से आलोचना किए जाने पर माओ ने बीजिंग के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि यह एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक व सामाजिक विकास करना और लोगों की जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने कहा, “इस तरह के समझौते और सीपीईसी से कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इस मामले में चीन का रुख अपरिवर्तित है।

भारत ने कहा था हम CPEC प्रोजेक्ट को मान्यता नहीं देते

विदेश मंत्रालय की 9 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया था कि CPEC के तहत चीन PoK की शक्सगाम घाटी में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। इस पर आपका क्या कहना है? इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का इलाका है। हमने 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। हम उस समझौते को अवैध मानते हैं। उन्होंने आगे कहा- हम चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह भारत के उस इलाके से होकर गुजरता है जो पाकिस्तान के जबरन और अवैध कब्जे में है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। यह बात पाकिस्तान और चीन दोनों को कई बार साफ-साफ बताई जा चुकी है।

चीन ने 1948 में कब्जा कर 1963 में चीन को सौंप दिया था

बता दें कि सियाचिन ग्लेशियर, भारतीय क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा, शक्सगाम घाटी के निकट स्थित है और विशेष रूप से पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच वर्ष 2020 के गतिरोध के बीच रणनीतिक महत्त्व रखता है।पाकिस्तान ने 1948 में शक्सगाम घाटी पर अवैध कब्जा कर लिया था और 1963 में यह इलाका चीन को सौंप दिया था। तबसे इस भारतीय हिस्से पर चीन ने अवैध कब्जा कर रखा है।

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