अजय नीमा, उज्जैन। उज्जैन के बड़नगर क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। खरसौद खुर्द से पलदुना जाने वाली सड़क जब पूरी तरह जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो गई और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो आखिरकार मासूम स्कूली बच्चों को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हुए कहा कि ‘साहब हमारी सड़क बनवा दो, हमें स्कूल जाना है।’

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि जिन हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए थी, उन नन्हें हाथों ने भारी-भरकम फावड़े और तगाड़ी उठा रखी है। ये बच्चे तपती धूप और कीचड़ के बीच सड़क के गड्ढों को पत्थर और मिट्टी से भर रहे हैं ताकि वे सही समय पर स्कूल पहुंच सकें।

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इस स्थिति के बीच बच्चों ने वीडियो के माध्यम से सीधे देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। बच्चों ने कहा कि ‘हमारी सड़क बनवा दो’। मासूम छात्रों का कहना है कि सड़क खराब होने की वजह से वे आए दिन गिर जाते हैं और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं, लेकिन शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है, बल्कि विकास के उन दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है जो ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान के लिए किए जाते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मासूमों के इस संघर्ष को देखकर क्या सोया हुआ सिस्टम जागेगा या फिर भविष्य के इन कर्णधारों को इसी तरह सड़कों पर श्रम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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