रायपुर। वर्ष 2025–26 के लिए लागू की गई छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें सिर्फ़ आंकड़ों का संशोधन नहीं बल्कि यह राज्य की भूमि नीति में एक ऐतिहासिक सुधार भी हैं। लगभग आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किया गया यह व्यापक रेशनलाइजेशन आम जनता, किसानों, निवेशकों और शासन, सभी के लिए भरोसे और पारदर्शिता का नया अध्याय खोल रहा है।
20 नवंबर 2025 से प्रभाव में आ जाने वाली ये दरें “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के अंतर्गत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित की गई हैं। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में शहरीकरण, अधोसंरचना विकास, औद्योगिक निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे सभी क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

वर्षों पुरानी विसंगतियों पर किया गया निर्णायक प्रहार
पिछले आठ वर्षों से गाइडलाइन दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी गाइडलाइन मूल्य के बीच काफ़ी अंतर पैदा हो गया था। इसका सीधा नुकसान किसानों और आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा था। भूमि का बाजार मूल्य कहीं अधिक होता था तो कहीं गाइडलाइन बहुत कम जिससे न तो उचित मुआवजा मिल पाता था और न ही पारदर्शी लेन-देन संभव हो पाता था।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस जटिल समस्या को समझते हुए वैज्ञानिक और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया। परिणामस्वरूप, गाइडलाइन दरों का ऐसा रेशनलाइजेशन किया गया, जो भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क, क्षेत्रीय चरित्र, शहरी–ग्रामीण विकास और बाजार व्यवहार—सभी पहलुओं को ध्यान में रखता है।

वैज्ञानिक पद्धति से हुआ दरों का निर्धारण
नई गाइडलाइन तैयार करने में विभाग ने केवल अनुमान या पुराने आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि पिछले 7–8 महीनों में वर्ष 2018–19 की दरों को आधार बनाकर विस्तृत बाजार अध्ययन किया गया। समान मार्ग, समान भौगोलिक महत्व और समान सुविधाओं वाले क्षेत्रों को समूहबद्ध कर तर्कसंगत दरें तय की गईं।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि एक ही वार्ड या एक ही सड़क पर पहले मौजूद कृत्रिम असमानताएँ समाप्त हो गईं। अब नागरिकों को यह समझने में कोई भ्रम नहीं रहेगा कि उनकी संपत्ति का मूल्यांकन किस आधार पर किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व से शहरी क्षेत्रों में भी आ रही स्पष्टता और सरलता
शहरी इलाकों में वर्षों से एक ही वार्ड में 10–12 तक अलग-अलग कंडिकाएँ लागू थीं। इससे न केवल आमजन भ्रमित होते थे, बल्कि पंजीयन और स्टाम्प शुल्क के समय विवाद की स्थिति भी बनती थी।
नई गाइडलाइन में अनावश्यक और काल्पनिक कंडिकाओं को हटाकर समान प्रकृति वाले क्षेत्रों को एकीकृत किया गया है। उदाहरणस्वरूप, कोरबा नगर निगम के वार्ड 12 में पहले पाँच अलग-अलग दरें थीं, जिन्हें अब एक समान कर तर्कसंगत बनाया गया है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि साय सरकार की प्राथमिकता व्यवस्था को सरल बनाना और जनता को राहत देना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को मिल रहा है बड़ा लाभ
नई गाइडलाइन का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला है। पहले एक ही मार्ग से जुड़े गांवों में भी भूमि दरों में भारी अंतर था। कहीं-कहीं तो दरें इतनी कम थीं कि किसानों को न तो उचित मुआवजा ही मिलता था और न ही भूमि बिक्री का वास्तविक लाभ ही मिल पाता था।अब समान मार्ग, समान भू-खंड प्रकार और समान भौगोलिक महत्व के आधार पर गांवों का समूह बनाकर दरें तय की गई हैं। रामपुर–नोनबिर्रा मार्ग से जुड़े गांवों की दरों को रेशनलाइज कर 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया जाना इसका स्पष्ट उदाहरण है। यह फैसला किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मान दोनों सुनिश्चित करता है।
ढाई गुना प्रावधान हटाकर बड़ा जनहित निर्णय
साय सरकार का सबसे सराहनीय निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि पर लागू ढाई गुना दर के प्रावधान को समाप्त करना रहा है। पहले इस प्रावधान के कारण किसानों और आम नागरिकों पर अनावश्यक स्टाम्प और पंजीयन शुल्क का बोझ पड़ता था। अब कृषि भूमि की दर के अनुसार ही बाजार मूल्य तय होगा जिससे सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। इस नई व्यवस्था में किसानों के हजारों रुपये तक की बचत हो रही है।

छोटे किसानों और आम नागरिकों को मिल रही सीधी राहत
नई गाइडलाइन में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्गमीटर की दर समाप्त कर हेक्टेयर दर लागू की गई है। इससे छोटे भूखंडों के मूल्यांकन में जो असमानता थी वह समाप्त हो गई है। नई व्यवस्था में स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में उल्लेखनीय कमी आई है मिलने वाली यह राहत उन परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनके लिए भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।
निवेश और विकास को मिलेगा नया बल
पारदर्शी और वास्तविक गाइडलाइन दरें राज्य में निवेश के नए द्वार खोल रही हैं। जब भूमि मूल्यांकन स्पष्ट और विश्वसनीय होगा तो उद्योग, आवासीय परियोजनाएं और अधोसंरचना विकास में भी तेज़ी आएगी। छत्तीसगढ़ पहले ही औद्योगिक, खनिज और कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। नई गाइडलाइन दरें इस विकास यात्रा को और मजबूत बनाएँगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दूरदर्शी नेतृत्व
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें न्याय, संतुलन और जनकल्याण की मूल भावना भी इसमें निहित है। साय सरकार ने यह सिद्ध किया है कि सुधार वही टिकाऊ होता है जिसमें किसान, नागरिक और निवेशक सभी का हित समाहित हो।
वर्ष 2025–26 की नई गाइडलाइन दरें छत्तीसगढ़ में भूमि प्रबंधन और संपत्ति लेन-देन की दिशा में एक मील का पत्थर बन रहा हैं। यह सुधार न केवल पुरानी विसंगतियों को दूर कर रहा है बल्कि राज्य को पारदर्शी, न्यायपूर्ण और विकासोन्मुख भविष्य की ओर भी ले जा रहा है।यह भी कहा जा सकता है कि नई गाइडलाइन दरें छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास मॉडल की ऐसी मजबूत आधारशिला बन रही हैं जिसके केंद्र में है साय सरकार की स्पष्ट नीति और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता।


