Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने बेदखली और वसूली से जुड़े दावे को निचली अदालत की ओर से पक्षकार की अनुपस्थिति के कारण पन्द्रह साल पहले खारिज दावे को सशर्त बहाल कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वह सार्वजनिक स्थान पर 25 छायादार पौधे लगाकर उसकी देखभाल करेगा।

वहीं अदालत ने प्रतिवादियों को दस हजार रुपए भी अदा करने को कहा है। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश रशीदन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पौधारोपण से जुड़ी फोटो निचली अदालत में पेश करेगा और इसकी देखभाल का शपथपत्र भी देगा। यदि इस शर्त की पालना नहीं की गई तो निचली अदालत इसकी जानकारी हाईकोर्ट में पेश करेगा।
याचिका में अधिवक्ता मोहम्मद अनीस ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने साल 1989 में शहर की निचली अदालत में बेदखली और वसूली का दावा किया था। साल 1994 में अदालत ने मामले में सुनवाई के बिंदु तय करते हुए प्रकरण को साक्ष्य के लिए रखा।
याचिका में कहा गया कि सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने 25 अक्टूबर, 2010 की तारीख दी थी, लेकिन भूलवश डायरी में यह तारीख 25 नवंबर अंकित हो गई। जिसके कारण तय तिथि पर सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता की ओर से कोई पेश नहीं हो सका और निचली अदालत ने केस को खारिज कर दिया। इसे पुनः बहाल करने के लिए निचली अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया, लेकिन अदालत ने प्रार्थना पत्र तय मियाद के बाद पेश होने के आधार पर खारिज कर दिया।
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