US and Europe Clash over Greenland: ग्रीनलैंड पर कब्जे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ऐलान के बाद नाटो (NATO) में ही फूट पड़ गई है। ग्रीनलैंड पर अमेरिका और यूरोप में तकरार बढ़ गई है। फ्रांस और ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध किया। इसके बाद ट्रंप ने फ्रांस-ब्रिटेन समेत 8 देशों पर 10% टैरिफ (10% tariff) लगाया। अब यूरोपीय नेताओं (खासकर फ्रांस ने) ने एकजुट होकर इसका विरोध किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने ट्रंप के फैसले पर लिखा-फ्रांस यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसी आधार पर फ्रांस यूक्रेन का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। मामला अब अमेरिका और यूरोपमें कूटनीति से आगे आर्थिक जंग की ओर बढ़ता दिख रहा है।
दरअसल ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह फरवरी से आठ यूरोपीय देशों से आने वाले सामानों पर 10% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाएंगे, क्योंकि वे ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि ये वही देश हैं जो ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास का हिस्सा हैं। ट्रंप के इस फैसले की फ्रांस और ब्रिटेन ने खुलकर आलोचना की है। ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद EU ने आज इमरजेंसी बैठक भी बुलाई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया जाएगा। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह टैरिफ तब तक रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड की ‘पूर्ण और समग्र खरीद’ के लिए डील नहीं हो जाती।

फ्रांस को ट्रंप की धमकियां नामंजूर
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के फैसले पर लिखा-फ्रांस यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसी आधार पर फ्रांस यूक्रेन का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। इसी वजह से फ्रांस ने ग्रीनलैंड में डेनमार्क द्वारा आयोजित सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने का फैसला किया।
फ्रांस इस फैसले की पूरी जिम्मेदारी लेता है, क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र और यूरोप की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा दांव पर है। मैक्रों ने आगे लिखा-‘फ्रांस को न तो धमकियों से डराया जा सकता है और न ही दबाव में लाया जा सकता है। चाहे मामला यूक्रेन का हो, ग्रीनलैंड का हो या दुनिया के किसी भी हिस्से का। मैक्रों ने ये भी कहा कि टैरिफ यानी शुल्क लगाने की धमकियां पूरी तरह गलत हैं. अगर ऐसी धमकियां सच में लागू होती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट होकर और मिलकर जवाब देंगे. यूरोप अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
वहीं यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा-ग्रीनलैंड को लेकर हमारा रुख बिल्कुल साफ है। यह डेनमार्क के किंगडम का हिस्सा है और उसका भविष्य ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क को ही तय करना है. नाटो की सामूहिक सुरक्षा के लिए काम कर रहे सहयोगी देशों पर टैरिफ यानी शुल्क लगाना पूरी तरह गलत है। इस मुद्दे को हम सीधे अमेरिकी प्रशासन के सामने उठाएंगे।
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