Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग से जुड़े तीन अंकों वाले पुराने वाहन नंबरों के रिटेंशन मामले की सुनवाई हुई। इस प्रकरण में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) सुनील सैनी सहित 10 अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज FIR और विभागीय कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है।

याचिका में बताया गया कि विभाग द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। रिपोर्ट में पुराने वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण, तीन अंकों वाले पुराने रजिस्ट्रेशन नंबरों के संरक्षण और वर्ष 2013 से पहले के वाहनों के बैकलॉग डेटा को VAHAN सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। इसके चलते राज्य सरकार को 400 से 600 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि न तो अंतरिम जांच रिपोर्ट और न ही अंतिम रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी अधिकारी को सुनवाई का मौका दिया गया। बिना नोटिस और बिना स्पष्टीकरण मांगे रिपोर्ट तैयार करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने दलील दी कि पूरी कार्रवाई अनुमान और कयासों पर आधारित है। कथित राजस्व नुकसान के समर्थन में न तो किसी वित्तीय सलाहकार की रिपोर्ट है और न ही वाहन-वार विवरण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि किस वाहन से कितना नुकसान हुआ, किस अधिकारी ने किस नियम का उल्लंघन किया और आपराधिक मंशा का आधार क्या है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि 1989 से पूर्व जारी तीन अंकों वाले रजिस्ट्रेशन नंबरों को VIP, हेरिटेज या फैंसी बताकर आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उस दौर में ऐसी कोई श्रेणी अस्तित्व में नहीं थी। सभी वाहन सामान्य क्रम में पंजीकृत होते थे। परिवहन विभाग ने समय-समय पर आदेश जारी कर पुराने नंबरों के रिटेंशन और ट्रांसफर की अनुमति दी और निर्धारित शुल्क भी वसूला गया। ऐसे में यह दावा कि इन नंबरों की नीलामी से सैकड़ों करोड़ रुपये की आय होती, पूरी तरह काल्पनिक और अव्यावहारिक है।

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