रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. खीरों विकासखंड के उदवतपुर सेक्शन में सिंचाई विभाग की ओर से कराई जा रही नहर सफाई का मामला गंभीर भ्रष्टाचार का रूप ले चुका है. पुरवा ब्रांच से निकलकर किशुनपुर माइनर होते हुए बंगलहन, बलभद्र खेड़ा, किशुनपुर, मथुरा खेड़ा और सलीमापुर तक करीब चार किलोमीटर लंबी नहर की सफाई अधूरी और नाममात्र की होने के कारण पटरी कई जगहों पर टूट गई. इससे सैकड़ों बीघा गेहूं की खड़ी फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
किसानों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सफाई कार्य केवल कागजों पर दिखाया गया. विशेष रूप से मथुरा खेड़ा से पहले निहत्था खीरों मार्ग के पास पुल के आगे सिल्ट (गाद) साफ नहीं कराई गई. बिना उचित सफाई के पानी छोड़ने से नहर की पटरी क्षतिग्रस्त हो गई और पानी खेतों में भर गया. प्रभावित किसानों में शिवकुमार, लक्ष्मण, धर्मेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार द्विवेदी, सोनू द्विवेदी, हरिशंकर पाल, रामखेलावन पाल सहित कई अन्य शामिल हैं.
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किसानों ने बताया कि ठेकेदार और कुछ विभागीय कर्मचारी शिकायत करने पर धमकियां दे रहे हैं. ठेकेदारों के मुताबिक, “ज्यादा शिकायत करोगे तो इसी तरह खेतों में पानी भर जाएगा.” अधिशासी अभियंता गगन कुमार शुक्ला ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों की जांच कराई जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन नहरों की सफाई ठीक से नहीं हुई, उनका भुगतान नहीं किया जाएगा और उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
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