हर्षित तिवारी, खातेगांव। आस्था के केंद्र नर्मदा घाट पर प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। बीजलगांव स्थित नर्मदा घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जरुरी अस्थायी रैम्प का अब तक बन पाया है। जबकि 25 जनवरी से नर्मदा जयंती, श्रीमद् भागवत कथा, यज्ञ और सामूहिक स्नान जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों का आयोजन प्रस्तावित है। इन आयोजनों में दूर-दराज से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, लेकिन बुनियादी व्यवस्थाओं की अनदेखी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। 

स्थानीय ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला कलेक्टर के नाम आवेदन पत्र लिखकर एसडीएम कार्यालय में सौंपा है। आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि नर्मदा घाट पर स्थायी या अस्थायी रैम्प की व्यवस्था नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को नदी तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

घाट का रास्ता फिसलन भरा और नुकीले पत्थर होने से किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल धार्मिक आयोजनों से पहले प्रशासन को मौखिक और लिखित रूप से इसकी जानकारी दी जाती है। बावजूद कोई समाधान नहीं निकाला गया। जबकि पंचकोशी यात्रा जैसे आयोजनों के दौरान कुछ ही घंटों में अस्थायी रैम्प बनवा दिया जाता है। ऐसे में बीजलगांव नर्मदा घाट को लेकर प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है। बताया जा रहा है कि एस.डी.एम प्रवीण प्रजापति के संज्ञान में यह पूरा मामला है और वह गंभीरता से इसे पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। 

आवेदन पत्र में यह भी कहा गया है कि तकनीकी रूप से अस्थायी रैम्प बनाना बहुत आसान है। लगभग 150 फीट लंबाई और 35 से 40 फीट चौड़ाई का रैम्प सिर्फ 5 से 7 घंटे में पोकलेन मशीन की मदद से बनाया जा सकता है। इसके लिए नदी क्षेत्र के आसपास मौजूद रेत का ही उपयोग किया जाएगा।

ग्रामीणों का आरोप प्रशासनिक लापरवाही

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा श्रद्धालुओं को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते रैंप नहीं बनाया गया और किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? यह सवाल अब आमजन के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। आस्था से जुड़े इतने बड़े आयोजनों में व्यवस्थाओं की अनदेखी न केवल प्रशासन की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि जनहित के दावों को भी खोखला साबित करती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर और एसडीएम से शीघ्र हस्तक्षेप कर अस्थायी रैम्प निर्माण के निर्देश देने की मांग की है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस आवेदन को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या समय रहते श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा। फिलहाल बीजलगांव का नर्मदा घाट प्रशासनिक उदासीनता और आस्था के बीच झूलता नजर आ रहा है।

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