EU-India Trade Deal: भारीभरकम अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद विश्व की राजनीति में भारत का इस समय डंका बज रहा है। एक ओर जहां अमेरिका भारत के साथ डील को लेकर सक्रिय दिख रहा है। वहीं यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ ट्रेड डील पर फाइनल फैसला हो गया है। 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान EU और India के बीच मेगा ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है। ग्रीनलैंड पर अमेरिका से टकराव के बीच भी  यूरोप भारत को एक भरोसेमंद और अनिवार्य साझेदार के रूप में देख रहा है।

यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर भारत आ रहे हैं। भारत आने से पहले ही यूरोपीय यूनियन के नेता यह स्वीकार कर चुके हैं कि भारत अब केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि उनकी रणनीतिक मजबूरी बन चुका है। ‘भारत के बिना हम अधूरे हैं’ जैसे शब्द बदलते वैश्विक समीकरणों की साफ झलक देते हैं।

दिल्ली में होने वाला EU–India समिट केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं है। इस दौरान सुरक्षा, रक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग से जुड़े अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो भारत–यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाएंगे। यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि भारत यूरोप की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक स्थिरता के लिए अनिवार्य बन चुका है। नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और साइबर डिफेंस में सहयोग को मजबूत किया जाएगा। हिंद महासागर में खुले समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस और जबरदस्ती की राजनीति के खिलाफ साझा रणनीति तैयार होगी। इसे चीन की आक्रामक समुद्री नीति पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, आर्थिक खेल भी बड़ा

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से अटकी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी अब रफ्तार के संकेत मिल रहे हैं। स्वच्छ तकनीक, फार्मा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में सहयोग से भारत को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही मोबिलिटी फ्रेमवर्क के जरिए छात्रों, कुशल पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर खुलने की संभावना है।

पाकिस्तान के लिए बढ़ेगी बेचैनी

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और यूरोपीय यूनियन का एक मंच पर आना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। काउंटर टेररिज्म सहयोग के मजबूत होने से आतंकी नेटवर्क पर वैश्विक दबाव बढ़ेगा। यूरोप का भारत के रुख को स्वीकार करना पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग को कमजोर करने वाला कदम माना जा रहा है।

चीन को सताई चिंता

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, खुले समुद्री रास्तों और नियम आधारित व्यवस्था की बात सीधे तौर पर चीन की विस्तारवादी नीति को चुनौती देती है। EU–India साझेदारी के जरिए टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और साइबर सिक्योरिटी में भरोसेमंद मानक विकसित होंगे, जो चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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