लुधियाना। पंजाब के सरकारी स्कूलों में 5वीं कक्षा की प्री बोर्ड परीक्षाओं को लेकर शिक्षा विभाग और स्टेट कौंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को परखने के मकसद से आयोजित की जाने वाली इन परीक्षाओं का मजाक बनकर रह गया है। विभाग ने प्रश्नपत्र भेजने की बजाय स्कूलों को केवल सैंपल पेपर थमा दिए हैं जिससे परीक्षाओं की तैयारी को परखने का मकसद ही खत्म हो गया है।
विभाग की लाचार कार्यशैली के कारण न केवल परीक्षाओं की गंभीरता खत्म हो गई है, बल्कि अध्यापक और विद्यार्थी भी भारी असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं। आलम यह है कि परीक्षा के लिए जरूरी संसाधनों और स्पष्ट निर्देशों के अभाव में शिक्षा तंत्र की पोल खुलती नजर आ रही है जिसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। विभाग द्वारा किए गए दावों और धरातल पर हो रहे काम में जमीन आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे अध्यापकों में भारी रोष है।
अध्यापकों की जेब पर पड़ी मार
व्हाट्सएप पर आए पेपर्स को स्कूलों द्वारा फोटो कॉपी करवाया जा रहा है। फोटो कॉपी करवाने के लिए विभाग द्वारा किसी भी तरह की कोई ग्रांट जारी नहीं की गई है जिसके चलते अध्यापक उधार अथवा अपनी जेब से पैसे खर्च करते हुए विद्यार्थियों के लिए क्वैश्चन पेपर अरेंज करवा रहे हैं। प्री-बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, 8वीं, 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र स्कूलों को अपने स्तर पर तैयार करने हैं लेकिन संसाधनों की कमी और स्पष्टता के अभाव में यह प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

दाखिले का दबाव, सुविधाओं का अभाव
एक तरफ तो विभाग स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले बढ़ाने के लिए अध्यापकों पर दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ विभाग की इस लचर कार्यशैली के चलते आम लोग सरकारी स्कूलों से मुंह फेर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब बोर्ड तीनों मीडियम को मान्यता देता है तो केवल एक भाषा में सैंपल पेपर उपलब्ध कराना विभाग की लापरवाही और भेदभाव को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है क्योंकि वे परीक्षा के सही पैटर्न को समझ नहीं पा रहे हैं।
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