भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी के बंटवारे का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है. पड़ोसी देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की भारत विरोधी रवैये की वजह से यह मामला और भी जटिल हो गया है. चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को बांग्लादेश में घुसने देने और बीजिंग को भारतीय सीमा के करीब प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए आमंत्रित करने के यूनुस के कदम पर भारत की पैनी नजर है. यूनुस सरकार ने एक और उकसावे वाला कदम उठाकर अपनी नीयत साफ कर दी है. इसका ताज़ा ताज़ा सबूत कुछ दिनों पहले तब मिला जब बांग्लादेश ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता मास्टर प्लान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने बीते सोमवार को तीस्ता नदी प्रोजेक्ट एरिया का दौरा किया.
बताते चले कि इससे पहले मार्च 2025 में यूनुस ने बीजिंग का दौरा किया था, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने ‘7 सिास्टर्स’ यानी पूर्वोत्तर भारत के 7 प्रदेशों का जिक्र किया था. अब यूनुस ने एक और बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है. बांग्लादेश ने पद्मा नदी (भारत में गंगा नदी) पर नया बैराज बनाने का ऐलान किया है.
यूनुस भारत के खिलाफ लगातार साजिश रच रहे हैं. इसका सबूत कुछ दिनों पहले तब मिला जब बांग्लादेश ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता मास्टर प्लान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने सोमवार 19 जनवरी 2026 को तीस्ता नदी प्रोजेक्ट एरिया का दौरा किया. यह इलाका भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, के काफी नजदीक है. यही 22 किलोमीटर चौड़ी पतली पट्टी भारत के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर राज्यों (Northeastern States) से जोड़ती है.
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी फरक्का संधि को रीन्यू करने पर बातचीत इस साल निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़े तनाव और आपसी अविश्वास के चलते वार्ताएं ठप सी दिखाई दे रही हैं. पद्मा नदी को भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद गंगा का ही विस्तार माना जाता है. पद्मा बांग्लादेश की जीवनरेखा कही जाती है. इसपर लाखों लोग निर्भर करते हैं.
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई फरक्का जल संधि इस वर्ष समाप्त हो रही है और इसे नवीनीकरण की आवश्यकता है. डाउनस्ट्रीम गंगा नदी पर नया बैराज बनाने के बांग्लादेश के कदम को भारत पर जारी निर्भरता को खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ढाका अब जल सुरक्षा के मुद्दे पर भारत पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता और अपने संसाधनों से समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक पर चीन की नजर 1962 के युद्ध से ही है. उस वक्त भी चीन ने इस कॉरिडोर को बाधित कर भारत को नॉर्थईस्टर्न स्टेट्स से काटने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहा था. शेख हसीना सरकार की तख्ता पलट के बाद अब मोहम्मद यूनुस की नजर भी चिकन नेक को लेकर टेढ़ी है. वे इस क्षेत्र में लगातार साजिश कर रहे हैं. चिकन से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित लालमोनिरहाट में एयरबेस को अपग्रेड करने के लिए ढाका ने चीन को आमंत्रित किया है. अब तीस्ता नदी के बहाने रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस कॉरिडोर को लेकर साजिश रची जा रही है.
तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी इलाकों में खेती और लोगों की रोजी-रोटी के लिए बहुत जरूरी है. वहीं भारत में, खासकर पश्चिम बंगाल के लिए भी यह नदी उतनी ही अहम है. इसी वजह से तीस्ता के पानी को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कई सालों से बातचीत चल रही है.
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