चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज, पनबस-पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब ने सरकार को चेताया कि यदि जायज मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में चक्का जाम, गेट रैलियां और सीएम आवास पर धरना दिया जाएगा। यह ऐलान यूनियन ने 25 जनवरी को बैठक में किया।

यूनियन राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि आजादी के बाद भी कर्मियों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। संघर्षरत कर्मियों पर झूठे मामले दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद किया गया है।

सरकार कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए विभाग के निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। बार-बार किलोमीटर स्कीम के टेंडर लाए जा रहे हैं, जबकि यूनियन इसके घाटे में होने के पुख्ता सबूत पहले ही पेश कर चुकी है। यूनियन नेताओं ने कहा कि 58 दिन बीतने के बावजूद जेल में बंद नेताओं को रिहा नहीं किया गया। सरकार बार-बार सहमति बनाकर उससे पीछे हट रही है और सिर्फ समय टालने का काम कर रही है।


संविधान हर नागरिक को आवाज उठाने का अधिकार देता है, लेकिन हक मांगने वाले कर्मचारियों को दबाया जा रहा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि पनबस और पीआरटीसी को मुफ्त यात्रा योजना के 1200 करोड़ रुपए का भुगतान करना बाकी है। विभाग वेतन देने में असमर्थ है, जबकि नई बसें खरीदने के लिए बैंकों से कर्ज लेने की मंजूरी सरकार नहीं दे रही है।


ठेकेदारी प्रथा के चलते कच्चे कर्मियों का कम वेतन पर शोषण हो रहा है और उन्हें पक्का नहीं किया जा रहा है। राज्य महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि 26 जनवरी को संविधान दिवस पर सभी डिपुओं के गेट रैलियां की जाएंगी। कर्मी काले रिबन बांधकर विरोध करेंगे और रूट ड्यूटी निभाई जाएगी।

यूनियन ने चेताया कि यदि 28 जनवरी की बैठक में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो संघर्ष तेज होगा। वहीं, 9 फरवरी को गेट रैलियां, 11 फरवरी को बस डिपो बंद किए जाएंगे। 12 फरवरी को पूर्ण हड़ताल कर सीएम की रिहाइश के बाहर धरना दिया जाएगा। सबसे बड़ी मांग यह है कि कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत चालकों, कंडक्टरों और अन्य स्टाफ को स्थायी पक्की नौकरी दी जाए।