देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली में आयोजित एक अकादमिक कॉन्फ्रेंस अब विवादों के घेरे में आ गई है। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन 16 से 18 जनवरी के बीच हुआ था और इसका विषय था ‘जाति और नस्ल‘। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कॉन्फ्रेंस के दौरान उठाए गए कुछ मुद्दों और चर्चा के अंदाज़ को लेकर संस्थान प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। IIT दिल्ली की ओर से मामले की तत्काल जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
जांच के आदेश
IIT दिल्ली प्रशासन ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित ‘जाति और नस्ल’ पर कॉन्फ्रेंस के वक्ताओं और कंटेंट को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्थान ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है, जिसमें स्वतंत्र सदस्य भी शामिल होंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कॉन्फ्रेंस के आयोजन में संस्थान की आचार संहिता और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं, और किसी तरह के अनुचित व्यवहार या संवेदनशील सामग्री का उपयोग तो नहीं किया गया। IIT दिल्ली की ओर से यह भी जोर दिया गया कि शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही संस्थान सभी प्रतिभागियों और समुदायों की सुरक्षा और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना भी आवश्यक समझता है।
किस मुद्दे पर थी यह कॉन्फ्रेंस?
इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज विभाग ने किया था और इसका विषय था ‘क्रिटिकल फिलॉसफी ऑफ कास्ट एंड रेस’। कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य डरबन में हुई ‘वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस अगेंस्ट रेसिज्म’ के 25 साल पूरे होने पर विचार-विमर्श करना था। इसमें शामिल लेक्चर्स और सत्रों में निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया जाति, नस्ल और लिंग, दलित अधिकार, जाति रहित मानवतावाद.
हालांकि कॉन्फ्रेंस की थीम शैक्षणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, प्रशासन ने वक्ताओं और प्रस्तुत सामग्री को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। IIT दिल्ली ने मामले की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जिसमें स्वतंत्र सदस्य भी शामिल होंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रोफेसर की दलील: ‘पहले ही ली थी मंजूरी‘
IIT दिल्ली प्रशासन ने हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस ‘क्रिटिकल फिलॉसफी ऑफ कास्ट एंड रेस’ के आयोजक प्रोफेसर दिव्या द्विवेदी से स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने इस कदम के तहत कॉन्फ्रेंस के वक्ताओं और कंटेंट की समीक्षा की मांग की थी। हालांकि, प्रोफेसर द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह अकादमिक था और इसके लिए प्रशासन से पहले ही मंजूरी ले ली गई थी। उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस का शेड्यूल पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध था और इसका उद्देश्य सामाजिक असमानताओं पर आलोचनात्मक सोच पैदा करना था।
प्रोफेसर द्विवेदी ने यह भी कहा कि कॉन्फ्रेंस में चर्चा किए गए विषय जैसे जाति, नस्ल, लिंग और दलित अधिकार केवल शैक्षणिक शोध और बहस के लिए थे, किसी समुदाय को निशाना बनाने या विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से नहीं। IIT दिल्ली प्रशासन ने फिलहाल फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित कर दी है, जिसमें स्वतंत्र सदस्य भी शामिल हैं।
छात्रों ने कहा- सिर्फ पढ़ाई की बातें हुईं, कोई नारेबाजी नहीं
कॉन्फ्रेंस में शामिल छात्रों का कहना है कि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग थी। नाम न छापने की शर्त पर एक पीएचडी छात्र ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में कोई नारेबाजी या हिंसा नहीं हुई थी। उनका कहना था कि यह पूरी तरह से एक स्कॉलर डिस्कशन थी, जिसमें जाति और नस्ल जैसे सामाजिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। छात्र ने यह भी कहा कि ऐसे विषयों पर बहस पहले भी होती रही है और इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना था।
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