अमित पवार, बैतूल। एमपी के बैतूल में एक आदिवासी छात्रावास के वार्डन का करप्शन उजागर करने छात्रावास के बच्चे कलेक्टर के पास पहुंचे। जहां कलेक्टर के सामने छात्र, वार्डन और जनजातीय कार्य विभाग के जिम्मेदार सभी की पेशी हो गई। जिसमें सीधे तौर पर वार्डन की भ्रष्ट कार्यशैली उजागर हुई। कलेक्टर ने तत्काल वार्डन को निलंबित कर दिया।
दरअसल, शहर के हमलापुर में प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में 60 छात्र हैं। जिन्हें सरकारी योजना के तहत बिस्तर खरीदने के लिए प्रति छात्र 6 हजार की राशि मिली जो सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की गई। लेकिन वार्डन ने चालाकी दिखाई और छात्रों के खातों से रुपये निकलवाकर खुद बिस्तर खरीदने का ऑर्डर किसी अज्ञात फर्म को दे दिया। जबकि नियमानुसार वार्डन को इस तरह छात्रों के खातों से रुपये निकालने का कोई अधिकार नहीं था।
पैसे लेने के बावजूद बिस्तर नहीं खरीदे गए और छात्र ठंड में पुराने बिस्तरों पर ही सोते रहे। जब कलेक्टर ने सभी पक्षों की बात सुनी और आखिर में छात्रों के परिजनों से भी फोन पर जानकारी ली तो वार्डन के कहने पर छात्रों के अकाउंट से रुपये निकालने की शिकायत सही पाई गई। वार्डन ने पैसे लेने की बात स्वीकार की, जिसके बाद कलेक्टर ने कार्रवाई कर उसे सस्पेंड कर दिया।
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