रायपुर। संसद के बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए माओवाद के दंश से मुक्त हो रहे बस्तर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पूरा देश माओवाद से प्रभावित इलाकों में बदलाव देख रहा है.
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जब 25 साल बाद बीजापुर के एक गांव में बस पहुंची, तो गांव वालों ने इसे त्योहार की तरह मनाया. युवा बस्तर ओलंपिक्स में जोश से हिस्सा ले रहे हैं. जिन लोगों ने हथियार डाल दिए हैं, वे अब जगदलपुर के पंडुम कैफे में काम कर रहे हैं.

मोदी सरकार की प्राथमिकता को गिनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की पॉलिसी के तहत, सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंकवाद के खिलाफ भी सख्ती से कार्रवाई की है. सालों से देश के 126 जिलों में असुरक्षा, डर और अविश्वास का माहौल था. माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया था. हमारे युवा आदिवासी और दलित भाई-बहन सबसे ज़्यादा प्रभावित थे.
उन्होंने कहा कि आज माओवादी आतंकवाद की चुनौती 126 जिलों से घटकर सिर्फ आठ जिलों तक रह गई है. इनमें से सिर्फ तीन जिले ही सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. पिछले एक साल में, माओवाद से जुड़े लगभग दो हज़ार लोगों ने सरेंडर किया है. इससे लाखों नागरिकों की ज़िंदगी में शांति वापस आई है.
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार उन लोगों के लिए सामान्य और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित कर रही है जो हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं. वह दिन दूर नहीं जब देश माओवादी आतंकवाद के पूरी तरह खत्म होने का गवाह बनेगा.
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