गोविंद पटेल, कुशीनगर. प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना जिसका उद्देश्य हर गरीब को पक्की छत देना है, कुशीनगर में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. आरोप है कि नगर पालिका, नगर पंचायत के कुछ वार्ड सभासद और डूडा कार्यालय से जुड़े कर्मचारी मिलकर इस योजना को कमाई का जरिया बना चुके हैं. शिकायतों के मुताबिक, योजना में नाम दर्ज कराने के लिए गरीब लाभार्थियों से पहले 5 हजार रुपये की मांग की जाती है. इसके बाद जैसे ही पहली किस्त खातों में आती है, 35 हजार रुपये की और डिमांड सामने रख दी जाती है. जो पैसा नहीं देता, उसका नाम लाभार्थी सूची से हटा दिया जाता है और उसे “अपात्र” घोषित कर दिया जाता है.

कुछ लाभार्थियों ने कैमरे के सामने स्वीकार किया है कि उनसे योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे मांगे गए. सवाल यह है कि जब सबूत मौजूद हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर गंभीर आरोप शिकायत में डूडा कार्यालय के दो आउटसोर्सिंग कर्मचारियों—जितेंद्र प्रसाद और राजदीप यादव के नाम सामने आए हैं. बताया जाता है कि जितेंद्र प्रसाद पर पहले भी अवैध वसूली के आरोप लगे थे और उन्हें हटाया गया था, लेकिन बाद में वही कर्मचारी फिर उसी दफ्तर में कैसे लौट आया यह बड़ा सवाल है. आखिर किसके संरक्षण में मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला फाजिलनगर नगर पंचायत के एक व्यक्ति की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा. जांच शुरू हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही. अगर जांच सिर्फ फाइलों तक सीमित रही, तो गरीबों को न्याय कैसे मिलेगा?

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दूसरी तरफ आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं. प्रशासन के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के तहत जनपद कुशीनगर में कुल 78,096 आवेदन प्राप्त हुए. लगभग 30,000 आवेदनों का सत्यापन 21,314 पात्र–अपात्र आवेदकों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किय गया है. जनपद में कुल 6,231 लाभार्थियों को प्रथम किश्त का लाभ मिला है. मुख्यमंत्री द्वारा सिंगल क्लिक के माध्यम से 1 लाख की पहली किश्त लाभार्थियों के खातों में भेजी गई. वहीं जनपद के नगरों में पडरौना – 1,805 कुशीनगर – 174 हाटा – 865 सुकरौली – 60 मथौली – 475कप्तानगंज – 15 रामकोला – 1,295 छितौनी – 369 खड्डा – 108 दुदही – 147 फाजिलनगर – 120, सेवरही – 483 तमकुहीराज – 315 तीन किश्तों में 2.50 लाख सहायता योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को कुल 2.50 लाख की सहायता तीन किश्तों में दी जानी है. इसमें विधवाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, अनुसूचित जाति–जनजाति और अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता देने का दावा किया गया है.

सबसे बड़ा सवाल क्या प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना गरीबों के लिए है या वसूली के नेटवर्क के लिए? क्या जिला प्रशासन इन आरोपों पर सख्त कार्रवाई करेगा या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा और सबसे अहम जो परिवार आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं, क्या उनसे पक्के मकान का सपना भी पैसे देकर खरीदने को कहा जाएगा, जवाब सिस्टम को देना होगा?