Rajasthan News: रेगिस्तान की मिट्टी में खेलकर पले-बढ़े हनुमानगढ़ के बेटे ने बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। जिले के फेफाना गांव निवासी भारतीय सेना के जवान सुरेश कुमार ज्याणी लेह-लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों पर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई के समय जब दो साल के मासूम बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

12 दिन तक मौत से लड़े सुरेश

21 जाट रेजिमेंट में तैनात सुरेश कुमार ज्याणी लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में तैनात थे। कठिन मौसम और बर्फीली हवाओं के बीच उन्हें स्नो ब्लाइंडनेस और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने घेर लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली स्थित आर्मी बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 12 दिनों तक संघर्ष करने के बाद मंगलवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

वतन की सेवा के 10 साल

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुरेश 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। शहीद अपने पीछे एक 4 साल की बेटी, 2 साल का बेटा, पत्नी और भाई-बहन को छोड़ गए हैं। बुधवार को जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरा इलाका ‘शहीद सुरेश ज्याणी अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई

सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। अंतिम संस्कार में नोहर एसडीएम राहुल श्रीवास्तव, एएसपी गीता चौधरी और राजेंद्र चाचाण सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को नमन किया।

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