UGC विवाद में भारी फजीहत के बाद BJP अब बैकफुट पर नजर आ रही है. देश भर में इस फैसले के विरोध और सुप्रीम कोर्ट से इसपर रोक लगने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी पार्टी के बयानवीरों से मामले में परेशान है. बीजेपी ने अपने सभी केंद्रीय मंत्री और सांसदों को कहा है कि वे यूजीसी और उससे जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या बयान देने से परहेज करें. पार्टी की तरफ से कहा गया है कि वे इस निर्देश का कड़ाई से पालन करें. दरअसल, पार्टी ने राजनीतिक तौर पर संवेदनशील यूजीसी विवाद के बढ़ने पर अपने नेताओं को इस मुद्दे पर बयान देने से मना किया था पर कुछ सांसदों और मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर बयान दिया.
इसके बाद बीजेपी संसदीय दल की तरफ से सभी सांसदों और मंत्रियों को बयान देने से परहेज करने का निर्देश दिया गया है. गुरुवार को बीजेपी प्रवक्ताओं की बैठक में भी यूजीसी मामले पर बयान या डिबेट में जाने से मना किया गया. बता दें कि यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए यूजीसी नियम की भाषा अस्पष्ट है. इसका गलत इस्तेमाल संभव है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दखल नहीं देंगे को खतरनाक परिणाम होंगे. सीजेआई ने कहा कि स्थिति का फायदा उठाया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि फिलहाल यूजीसी का 2012 वाला नियम लागू रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया.
सामान्य वर्ग में जबरदस्त आक्रोश था
यूजीसी के नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के लोगों में जबरदस्त आक्रोश था. सरकार की सफाई के बावजूद गुस्से की आग बुझी नहीं थी. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया, जिसे एक वर्ग अपने लिए जीत मान रहा है तो दूसरा पक्ष इसे सरकार के लिए झटका बता रहा है. मगर सवाल जीत-हार का नहीं है बल्कि इस नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणियां की हैं, वो बहुत गंभीर है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या क्या कहा?
- अगर हम दखल नहीं देंगे तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे, समाज में विभाजन होगा.
- ऐसा ना हो कि अमेरिका जैसे हालात बन जाएं जहां अश्वेत और श्वेत अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे.
- भारत की एकता हमारे शिक्षण संस्थानों में दिखनी चाहिए.
- आप स्कूलों और कॉलेजों को अलग-थलग नहीं रख सकते, अगर कैंपस के अंदर ऐसा माहौल होगा तो लोग कैंपस के बाहर कैसे आगे बढ़ेंगे.
- संविधान में राज्यों को SC और ST के लिए कानून बनाने का अधिकार, लेकिन कानून में भेदभाव नहीं होना चाहिए.
- यूजीसी के जाति संबंधी नियम अस्पष्ट हैं, इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. इसकी भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत है.
- 75 साल बाद जाति विहीन समाज बनाने के मामले में हमने जो कुछ भी हासिल किया है, क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?
- हमें जाति विहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए, जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए.
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