अभय मिश्रा, मऊगंज। शिक्षा के मंदिर और सुरक्षित आश्रय माने जाने वाले सरकारी छात्रावास अब विवादों और अनुशासनहीनता के केंद्र बनते जा रहे हैं। पिपराही स्थित शासकीय अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास का एक शर्मनाक वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर संजय जैन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्रावास अधीक्षक रामानुज यादव को पद से हटा दिया है और उनकी वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं।
गणतंत्र दिवस पर ‘शर्मनाक’ जश्न
मामला बीते 26 जनवरी का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में छात्रावास के भीतर नाबालिग छात्र नशे में धुत होकर अश्लील गानों पर फूहड़ नृत्य करते दिखाई दे रहे हैं। जांच में सामने आया कि छात्रों ने पहले बाहर किसी होटल में शराब का सेवन किया और फिर परिसर के भीतर जमकर हंगामा किया और डीजे पर अश्लील गानों पर नृत्य किया। जिसकी जांच जिला संयोजक और स्थानीय प्राचार्य की संयुक्त टीम के द्वारा की गई और जांच रिपोर्ट तैयार की गई जिस रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
प्रशासन की नाक के नीचे कौन परोस रहा नाबालिगों को जहर?
इस घटना के बाद सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं कि आखिर नाबालिगों तक शराब कैसे पहुंची? वह कौन सा होटल या दुकानदार है जो नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को शराब बेच रहा है? प्रशासन ने अभी तक शराब माफिया और उन होटलों पर कोई कार्रवाई नहीं की है जहाँ इन बच्चों ने नशे का सेवन किया।
दागी मंडल संयोजक का ‘रसूख’ और विभाग की मिलीभगत
खबर केवल एक अधीक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के भीतर गहरे तक फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। छात्रावासों के पूर्व निलंबित मंडल संयोजक मनोज पटेल, जिन पर पूर्व में बालिका छात्रावासों में बिना सूचना देर शाम प्रवेश करने और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिसके कारण उन्हें कलेक्टर के द्वारा निलंबित किया जा चुका है लेकिन आज भी विभाग में सक्रिय हैं।निलंबन के बाद भी रसूख कायम है निलंबन झेल रहे पटेल को अब जिला संयोजक का ‘खास’ बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि वे जिला संयोजक के साथ उनकी निजी गाड़ी में घूमते हैं और जांचों में हिस्सा लेते हैं। चर्चा है कि यदि कलेक्टर कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, तो इस अवैध जुगलबंदी और अधिकारियों के साथ उनकी नजदीकियों की पुष्टि आसानी से हो सकती है।
व्यवस्थागत खामियां: 5 सालों से जमे सिपहसालार
जिले के छात्रावासों में नियम विरुद्ध पदस्थापनाओं की बाढ़ आई हुई है। कई अधीक्षक 5-5 वर्षों से एक ही स्थान पर कुंडली मारकर बैठे हैं। नियमों को दरकिनार कर लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थापना होने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच ऐसा गठजोड़ बन गया है, जिससे अनुशासनहीनता की ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं।पिपराही की यह घटना केवल एक बानगी है। यदि समय रहते मऊगंज के छात्रावासों की व्यवस्था और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
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