नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ने के लिए अहम रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर पर प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक एक सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन रूट सुनिश्चित करेगा. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि ज़मीन की इस पतली पट्टी की “रणनीतिक कमजोरी” को 1971 के बाद ही दूर कर देना चाहिए था.
सरमा ने X पर एक पोस्ट में कहा, “यह बहुत बड़ी बात है. दशकों से ‘चिकन नेक’ का इस्तेमाल देश के अंदर और बाहर दोनों जगह राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा डराने-धमकाने की रणनीति के तौर पर किया जाता रहा है.” उन्होंने आगे कहा, “प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक एक बड़ी रणनीतिक सफलता है, जो पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक सुरक्षित और फुलप्रूफ ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर बनाएगा.”
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा था कि 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक कॉरिडोर के साथ अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन बनाने की योजना चल रही है. इस रणनीतिक कॉरिडोर को इसके आकार के कारण ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, यह पश्चिम बंगाल के उत्तरी सिलीगुड़ी इलाके में ज़मीन की एक पट्टी है, जिसकी चौड़ाई 20 किलोमीटर से ज़्यादा है. यह पट्टी नेपाल और बांग्लादेश के बीच है, जबकि भूटान और चीन कुछ सौ किलोमीटर दूर हैं.
इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वैष्णव को धन्यवाद देते हुए सरमा ने कहा, “…हम इस लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक कमजोरी को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहे हैं – जिसे, अगर पीछे मुड़कर देखें तो, बहुत पहले ही दूर कर देना चाहिए था, शायद 1971 के बाद ही.”
सरमा ने पहले कहा था कि 1971 के युद्ध के बाद तत्कालीन PM इंदिरा गांधी “चिकन नेक कॉरिडोर का विस्तार करने के लिए कह सकती थीं”. उन्होंने कहा था, “वह पूर्वोत्तर के देश के बाकी हिस्सों तक सीधे पहुंच के लिए नक्शा फिर से बना सकती थीं और ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर पर निर्भर नहीं रहतीं.”
CM ने यह भी कहा था कि अगर भारत के पहले PM जवाहरलाल नेहरू ने बंटवारे के दौरान पाकिस्तान के साथ पंजाब के एक हिस्से के बदले “चटगांव बंदरगाह का सौदा” नहीं किया होता, तो पूर्वोत्तर ‘चिकन नेक’ पर निर्भर नहीं होता.
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड लाइनें पश्चिम बंगाल में टिन माइल हाट और रंगपानी रेलवे स्टेशनों के बीच होंगी. उन्होंने बताया कि एक लाइन पश्चिम बंगाल में बागडोगरा की ओर जाएगी, जो देश के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बहुत ज़रूरी है.
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