अभय मिश्रा, मऊगंज। लोकतंत्र में जनसुनवाई जनता की समस्या सुनने के लिए होती है, लेकिन मऊगंज जिले में यह माफिया के अवैध धंधों को सफेद करने का जरिया बन गई है। हर्रहा ग्राम पंचायत में आज प्रशासन के सामने एक आठ बच्चों की विधवा मां ने आत्मदाह की कोशिश की। उसकी चीख थी कि उसकी जमीन माफिया निगल गए, लेकिन साहबों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। हैरानी देखिए, जिस जमीन पर 80% उत्खनन पहले ही हो चुका है, लेकिन अवैध उत्खनन के खिलाफ किसी वैधानिक कार्यवाही के बजाय आज उसी की लीज के लिए प्रशासन अधिकारियों के साथ वहां तंबू गाड़कर बैठा था। आखिर किसका संरक्षण है इन भू-माफियाओं को?

जमीन बचाने के लिए कई बार फरियाद की

तस्वीरें हर्रहा ग्राम पंचायत की हैं, जहां लोक सुनवाई के दौरान भू-स्वामी ललिता मौर्य ने अपने ऊपर पेट्रोल उडे़ल लिया और आग लगाने लगी, गनीमत रही कि अपर कलेक्टर ने माचिस छीन ली, वरना प्रशासन के हाथ आज एक गरीब की जान से रंगे होते। महिला उस सिस्टम से हार चुकी है, जिससे इसने अपनी जमीन बचाने के लिए कई बार फरियाद की, लेकिन बदले में मिली सिर्फ अनदेखी।

सुनवाई की हकीकत शर्मनाक

मेजर्स अदयपुर सप्लायर एंड कांट्रेक्टर ,अरुण सिंह, पूजा सिंह के नाम पर होने वाली इस सुनवाई की हकीकत शर्मनाक है। खसरा नंबर 8/11, 8/12, 8/13 और 29/1… ये वो जमीनें हैं जहाँ लीज मिलने से पहले ही 80 से 100 फीट गहरी खाइयां खोद दी गई हैं। नियम कहते हैं कि उत्खनन लीज के बाद होगा, लेकिन यहाँ तो गंगा उल्टी बह रही है। पहले पहाड़ खोदकर पत्थर बेच दिए गए और जब जमीन छलनी हो गई, तब प्रशासन पर्यावरणीय स्वीकृति का ढोंग रच रहा है।

ब्लास्टिंग से घरों और स्कूल की दीवारें दरक चुकी

स्थानीय आदिवासियों और गौड़ समुदाय का आरोप है कि अवैध ब्लास्टिंग से उनके घरों और स्कूलों की दीवारें दरक चुकी हैं। रास्ते खोद दिए गए हैं। ग्रामीणों ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि 2 किलोमीटर दूर बैठकर सुनवाई मत कीजिए, मौके पर चलिए और देखिए कि वहां कुछ बचा भी है या नहीं? लेकिन प्रशासन के पास इन गरीबों के लिए समय नहीं था।

अपनी ही जमीन पर बेगाना

भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए! महज 2 दिन पहले संयुक्त जांच दल ने यहाँ अवैध उत्खनन पकड़कर मशीनें जब्त की थीं। लेकिन आज उसी अवैध काम को वैध बनाने की तैयारी चल रही थी। पीड़ित गिड़गिड़ाते रहे कि उनकी सरकारी जमीन माफिया से छुड़ाकर गड्ढे भरवाए जाएं, ताकि वे जी सकें, लेकिन माफिया के एग्रीमेंट और प्रशासन की चुप्पी ने उन्हें अपनी ही जमीन पर बेगाना बना दिया है।

‘आपकी बात ध्यान में रखी जाएगी’

प्रशासन कह रहा है कि ‘आपकी बात ध्यान में रखी जाएगी’, लेकिन सवाल ये है कि जब पत्थर चोरी हो गए और पहाड़ खत्म हो गए, तब ध्यान में क्या रखा जाएगा? क्या मऊगंज का प्रशासन उन माफियाओं पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने आदिवासियों की पट्टे भू आवंटन की जमीन को मौत का कुआं बना दिया है? या फिर एक और आत्मदाह की कोशिश का इंतजार किया जा रहा है?

ललिता मौर्या, शिकायतकर्ता

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