पटना। बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गंगा नदी पर बेगूसराय (सिमरिया) और पटना (मोकामा) को जोड़ने वाला नया डबल ट्रैक रेल पुल बनकर तैयार हो गया है। करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से बना 1.86 किलोमीटर लंबा यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा। जून 2026 तक इसके परिचालन का लक्ष्य रखा गया है।

स्पीड पर नहीं लगेगी ब्रेक

इस पुल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजर सकेंगी और प्रवेश के दौरान स्पीड कम नहीं करनी पड़ेगी। डबल ट्रैक होने से ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रुकना नहीं होगा, जिससे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी रूट पर यात्रा समय में 30 से 45 मिनट तक की कमी आएगी।

अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना

पुल का निर्माण वेल फाउंडेशन तकनीक से किया गया है। इसके 18 पायों को 65 से 70 मीटर गहराई तक स्थापित किया गया है, ताकि यह भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को आसानी से झेल सके। कुल 17 स्पैन में बने इस पुल का एक स्पैन 123 मीटर लंबा है, जिसकी भार क्षमता 1450 मीट्रिक टन है। फिलहाल ट्रैक बिछाने, सिग्नल, बिजली और सेफ्टी जांच का काम अंतिम चरण में है।

राजेंद्र सेतु का विकल्प

1959 में बने राजेंद्र सेतु ने छह दशक तक बिहार की जीवनरेखा का काम किया, लेकिन सिंगल लाइन होने से यह सेक्शन बॉटलनेक बन गया था। बढ़ते रेल यातायात और भारी मालगाड़ियों को देखते हुए नए पुल की जरूरत महसूस हुई। 2018 में इरकॉन ने एफकॉन एजेंसी को निर्माण सौंपा था और 26 जनवरी 2026 को इसका निर्माण पूरा हुआ।

उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

बरौनी रिफाइनरी, खाद कारखाना और एनटीपीसी जैसे बड़े उद्योगों के लिए यह पुल गेम चेंजर साबित होगा। कोयला, पेट्रोलियम और उर्वरक की ढुलाई तेज और सुगम होगी, जिससे लॉजिस्टिक लागत घटेगी और नए निवेश के रास्ते खुलेंगे।

सामरिक दृष्टि से भी अहम

यह पुल देश की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही रेल मार्ग से संभव होगी। साथ ही आरओबी, आरयूबी और तीन आरओआर के निर्माण से क्षेत्रीय यातायात को भी मजबूती मिलेगी।