Rajasthan News: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बीसीआर (बार काउंसिल ऑफ राजस्थान) चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए 30 फीसदी आरक्षण को ध्यान में रख इस संबंध में दायर जनहित याचिका बुधवार को निस्तारित कर दी।

खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट से तय हो चुका है, ऐसे में याचिका सारहीन हो गई है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश एडवोकेट हेमा तिवारी की जनहित याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान बीसीआई के अधिवक्ता निखिलेश कटारा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शपथ पत्र के आधार पर राज्यों की बार काउंसिलों के आगामी चुनावों में महिलाओं को समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पहले ही आरक्षण देने का निर्देश दे दिया है।

इस जनहित याचिका में भी प्रदेश की बार काउंसिल में महिलाओं को आरक्षण देने का मुद्दा उठाया है। ऐसे में अब यह जनहित आगे सुनवाई के लिए सारहीन हो चुकी है, लिहाजा इसे निस्तारित किया जाए। खंडपीठ ने बीसीआई की दलील व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर जनहित याचिका निस्तारित कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को राज्य बार काउंसिल में महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण दिया था।

यह कहा था जनहित याचिका में

जनहित याचिका में कहा था कि नारी शक्ति वंदन अभियान-2023 के तहत महिला आरक्षण अधिनियम लाया गया। जिसमें महिलाओं को संसद में 33 फीसदी आरक्षण का लाभदिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को अदिति चौधरी बनाम बार कौंसिल ऑफ दिल्ली व अन्य के मामले में बार कांउसिल ऑफ दिल्ली को निर्देश दिया है कि वह बार काउंसिल के चुनावों में महिला अधिवक्ताओं के लिए भी 33 फीसदी सीट आरक्षित रखें। प्रार्थिया ने भी बीसीआर को महिला अधिवक्ताओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए प्रतिवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री पद पर महिलाएं नियुक्त हो चुकी हैं।

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