हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के तीन दिवसीय GrainEx India कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किया, लेकिन मंच सिर्फ औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा। दाल कारोबारियों ने मौके का फायदा उठाते हुए सीधे सरकार के सामने अपनी आर्थिक परेशानियां रख दीं। सबसे बड़ी मांग रही — मंडी टैक्स में राहत और शहर के बीच चल रही अनाज मंडी को बाहर शिफ्ट करने का फैसला।

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कार्यक्रम में लगी प्रदर्शनी में दाल मिल उद्योग से जुड़ी आधुनिक मशीनें और नई तकनीकें दिखाई गईं। देशभर से व्यापारी और उद्योग प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन असली चर्चा मशीनों से ज्यादा नीतियों और टैक्स बोझ पर होती रही। मंच से मंत्री तुलसी सिलावट ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निवेश बढ़ने की बात कही और यह साल किसानों को समर्पित बताया। लेकिन कारोबारियों का साफ संकेत था — निवेश तभी बढ़ेगा जब टैक्स का दबाव कम होगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इंदौर की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन मॉडल की बात कही और व्यापारियों का स्वागत किया। 

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उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है और दाल हमारे भोजन का मुख्य प्रोटीन स्रोत है। सीएम ने दोहराया कि मध्य प्रदेश अब देश का “फूड बास्केट” बन चुका है। उन्होंने बताया कि तुअर पर टैक्स हटाने के बाद अब मसूर पर भी राहत देने की दिशा में सरकार काम करेगी। यह बयान व्यापारियों के लिए सीधी उम्मीद का संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार दाल उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है। मसूर और उड़द की खेती बढ़ाने के लिए बोनस योजना लाने पर विचार हो रहा है। साथ ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का भी जिक्र किया गया — यानी प्रोटीन नीति पर सरकार डबल स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है।मंच से व्यापारियों को सीधा संदेश दिया गया — फैक्ट्रियां लगाइए, आधुनिक मशीनें लगाइए, प्रोसेसिंग बढ़ाइए, सरकार साथ देगी। लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार घोषणाओं से आगे बढ़कर टैक्स और मंडी नीति पर ठोस फैसला कब लेती है। इंदौर के इस उद्योग मंच से साफ हो गया है कि दाल कारोबार अब सिर्फ व्यापार नहीं, नीति और राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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