रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर जिसे एक लम्बे समय तक केवल नक्सलवाद, हिंसा और भय का दूसरा नाम माना जाता रहा, लेकिन आज उसी बस्तर की पहचान तेजी से बदल रही है। यह परिवर्तन किसी संयोग का परिणाम नहीं बल्कि एक दूरदर्शी नेतृत्व, स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति और विश्वास आधारित विकास मॉडल का नतीजा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर को नक्सल प्रभावित क्षेत्र की संकीर्ण परिभाषा से निकालकर “राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र” के रूप में स्थापित करने का साहसिक संकल्प लिया गया। मुख्यमंत्री का यह संकल्प केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि जमीन पर दिखने वाले ठोस कामों, सुरक्षा की बहाली, बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्थानीय समाज की भागीदारी के माध्यम से साकार भी हो रहा है।

साय सरकार की पहल से लौट रही है बस्तर की मूल पहचान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “हमने एक साल में बस्तर की मूल पहचान वापस देने की दिशा में महती कार्य किया है।” दरअसल बस्तर की आत्मा उसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं, नदियाँ, जलप्रपात, वन और पर्वत और शांत, आत्मीय वातावरण में बसती है। दशकों तक नक्सल हिंसा के कारण यह पहचान धुंधली पड़ गई थी, मगर साय सरकार ने सबसे पहले इसी आत्मा को पुनर्जीवित करने का काम किया है।

विकास की पहली शर्त-‘सुरक्षा और विश्वास’ पर खरी उतरी साय सरकार

पर्यटन तभी पनप सकता है जब आम-जन के लिए सुरक्षा और विश्वास सुनिश्चहित हो। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रथम वर्ष के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक और निर्णायक कार्रवाई की गई। बस्तर में बहुत अधिक संख्या में नक्सली मारे गए जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है। आम नागरिकों में भय की जगह अब विश्वास लौट आया है। सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा के विस्तार ने पर्यटन को और आसान बना दिया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सुरक्षा बलों की खुले मंच से प्रशंसा करते हुए कहा है कि “बस्तर के नागरिक विकास से जुड़ना चाहते हैं और सरकार यही कर रही है।” सुरक्षा और विश्वास अब पर्यटन के विस्तार की नींव बन रहा है।

बस्तर को पर्यटन मानचित्र पर लाने की मुख्यमंत्री की स्पष्ट नीति

साय सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है- बस्तर को दया या सहानुभूति के नहीं बल्कि गर्व के टुरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में पहचाना जाना चाहिए। इस पहचान को बनाने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए एक विशेष “टूरिज्म कॉरिडोर” विकसित किया जा रहा है। यह कॉरिडोर न केवल भौगोलिक दूरी को घटाएगा बल्कि पर्यटकों को यादगार अनुभव भी देगा।चित्रकोट जलप्रपात,तीरथगढ़ जलप्रपात,कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांव इन सभी स्थलों को बेहतर सड़कों, संकेतक बोर्ड, सुविधाजनक परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है।

चित्रकोट जलप्रपात ‘छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी संपत्ति’

भारत का नियाग्रा कहलाने वाले चित्रकोट जलप्रपात को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी संपत्ति” बताया है।चित्रकोट जलप्रपात को नियाग्रा फॉल्स की तर्ज पर ही विकसित करने की योजना अब धरातल पर उतर रही है।विश्वस्तरीय होटल और रिसॉर्ट, व्यू प्वाइंट्स, वॉकवे, लाइटिंग, पर्यटक सूचना केंद्र, स्थानीय हस्तशिल्प बाजार यह सब मिलकर चित्रकोट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने वाला है।

साय सरकार की सबसे संवेदनशील और दूरगामी पहल होमस्टे और इको-टूरिज्म राज्य के लिए विकास का मानवीय मॉडल बन रही है। इस मॉडल में पर्यटन को उद्योग का दर्जा, स्थानीय परिवारों को होमस्टे संचालन का अवसर, युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदाय को सीधा रोजगार के साथ संस्कृति और प्रकृति दोनों को संरक्षण दिया जा रहा है।यह मॉडल बस्तर में रोजगार के साथ आत्मसम्मान भी पैदा कर रहा है। नेशनल हाईवे-30 का केशकाल घाटी जो बस्तर का प्रवेश द्वार कहलाता हैं उसकी मरम्मत और सौंदर्यीकरण की जा रही है। अब यह घाटी—सुरक्षित, आकर्षक, फोटोग्राफी और सैलानियों के लिए पसंदीदा जगह बनती जा रही है।

साय सरकार में हो रहा सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन का विस्तार

छत्तीसगढ़ का बस्तर केवल प्राकृतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक वैभव का केंद्र भी रहा है। बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव, लोकनृत्य, लोकसंगीत, जनजातीय कला, शिल्प और परंपराएं इनके लिए दसराहा पसरा जैसे स्थायी बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है ताकि सांस्कृतिक पर्यटन को एक नई ऊँचाई मिले।

UNWTO की मान्यता से मिली बस्तर को वैश्विक पहचान

बस्तर के धुड़मारास (दुधमारस) गांव को संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन (UNWTO) के द्वारा दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया जाना एक बड़ी उपलब्धि रही है। इसे साय सरकार की नीतियों की वैश्विक स्वीकृति मानी गई है।साय सरकार की यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर अब दुनिया के नक्शे पर है। स्थानीय विकास वैश्विक मानकों पर खरा उतर रहा है।


356 करोड़ के विकास कार्य से तय हो रही विकास यात्रा

जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने—356 करोड़ 44 लाख रुपये,288 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन,1 करोड़ 55 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि का वितरण
करके यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल पर्यटन नहीं बल्कि उसका समग्र विकास चाहती है

मोदी की गारंटी बनी बस्तर में भरोसे की बुनियाद

मुख्यमंत्री साय ने कहा—“छत्तीसगढ़ की जनता से मोदी की गारंटी के रूप में जो वादा किया था, उसे निभा रहे हैं।” बस्तर का बदला हुआ माहौल इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण बन रहा है कि मोदी की हर गारंटी पूरी की जा रही है।

बस्तर पर्यटन के स्वर्णकाल का हो रहा आरंभ

बस्तर प्राधिकरण की बैठक, नई पर्यटन योजनाएं, चित्रकोट और आसपास के क्षेत्रों में नए होटल-रिसॉर्ट ये सभी इस बात के संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में—बस्तर रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा, स्थानीय युवाओं का पलायन रुकेगा, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नया इंजन मिलेगा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है।राज्य के मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के भय से बाहर निकालकर बस्तर को विश्व पर्यटन के द्वार पर ला खड़ा किया है।