कुंदन कुमार/​पटना। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने शनिवार को विपक्षी दलों के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार सदन चलाने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने में विश्वास रखती है, न कि बल प्रयोग में। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रिजीजू ने कहा कि लोकतंत्र में गरमा-गरम बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन सदन की कार्यवाही को पूरी तरह ठप कर देना चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

​लोकतंत्र और मर्यादा का हवाला

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और विपक्ष के हंगामे पर चर्चा करते हुए रिजीजू ने कहा, हमारे पास पूर्ण बहुमत और संख्या बल है। अगर हम चाहते तो सदन में मार्शल तैनात कर भी कार्यवाही को संचालित कर सकते थे, लेकिन हमें भारत के लोकतंत्र और उसकी परंपराओं पर अटूट विश्वास है। उन्होंने खुलासा किया कि विपक्षी दलों के 40 से अधिक सांसद लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में पहुंचे थे, लेकिन अंततः पीएम पद की गरिमा और सदन की सुचारू कार्यवाही को देखते हुए अध्यक्ष के सुझाव पर निर्णय लिए गए। रिजीजू ने जोर देकर कहा कि सरकार हमेशा बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करती है, मगर विपक्ष सहयोग की जगह अवरोध पैदा कर रहा है।

​बिहार और पूर्वी भारत: विकास का नया इंजन

​केंद्रीय बजट की बारीकियों को साझा करते हुए रिजीजू ने बिहार को पूर्वी भारत के विकास की धुरी बताया। उन्होंने कहा, बिहार का भविष्य ही देश का भविष्य है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बिहार एक प्रवेश द्वार की तरह है। मंत्री ने बताया कि इस बार के बजट में बिहार के लिए एमएसएमई (MSME), रेल प्रोजेक्ट्स और ग्रामीण रोजगार की विशेष योजनाएं लाई गई हैं, जो 2014 से शुरू हुई विकास यात्रा को और मजबूती देंगी।

​रिफॉर्म एक्सप्रेस और 2047 का लक्ष्य

​प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के विजन पर बात करते हुए रिजीजू ने कहा कि देश में रिफॉर्म एक्सप्रेस चल पड़ी है जो अब रुकने वाली नहीं है। सरकार ने एक हाई-लेवल रिफॉर्म कमेटी का गठन किया है जिसका मुख्य उद्देश्य छोटी-छोटी प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को दूर करना है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि इन सुधारों के दम पर 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा। बजट की घोषणाएं और ग्रामीण भारत पर केंद्रित योजनाएं इसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम हैं।