Bastar News Update : बस्तर. जिले के नानगुर तहसील अंतर्गत ग्राम काकरवाड़ा में बेजुबानों पर हुई क्रूरता ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. चारा चर रहे गौवंश पर एक युवक ने धारदार टंगिया से हमला किया. इस हमले में चार मवेशी गंभीर रूप से घायल हुए हैं. एक बछड़े की पूंछ कटने और एक गाय का पैर टूटने से घटना की भयावहता सामने आई है. घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. पीड़ित गौपालकों का कहना है कि हमला पूरी तरह बेवजह किया गया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रूपेश बघेल को गिरफ्तार किया है. आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 सहित पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है. गंभीर रूप से घायल दो गौवंश को गौशाला में भर्ती कराया गया है. ग्रामीणों ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की है. साथ ही पीड़ित गौपालकों को मुआवजा देने की भी अपील की गई है. पुलिस का कहना है कि बेजुबानों पर अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.


जगदलपुर – जनविश्वास की वापसी के रूप में देखा गया लखमा का स्वागत
सुप्रीम कोर्ट से जमानत के बाद कोंटा विधायक कवासी लखमा के बस्तर आगमन को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है. शनिवार को केशलूर चौक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया. इस मौके पर बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय नेता मौजूद रहे. पूर्व विधायक राजमन बेंजाम ने इसे आदिवासी समाज की आवाज की वापसी बताया. उन्होंने कहा कि लखमा का संघर्ष क्षेत्र के विकास से जुड़ा रहा है. कार्यक्रम में आदिवासी हितों और सामाजिक न्याय की बात प्रमुखता से उठी. कवासी लखमा ने कार्यकर्ताओं और आम जनता का आभार जताया. उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा. कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक एकजुटता साफ दिखाई दी. स्थानीय कांग्रेस संगठन में नई ऊर्जा का संचार देखा गया. आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर हलचल तेज हो गई है. यह स्वागत केवल एक नेता का नहीं, बल्कि जनविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है.
बस्तर – गांजा तस्करी में असली नेटवर्क अब भी पुलिस की पकड़ से दूर
बस्तर संभाग के सातों जिलों में गांजा तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. लगभग हर दिन पुलिस किसी न किसी तस्कर को गिरफ्तार कर रही है. इन मामलों में मुखबिरों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है. मुखबिर तस्करों की पूरी जानकारी पुलिस तक पहुंचा देते हैं. हालांकि एक अध्ययन में सामने आया है कि पकड़े जाने वाले आरोपी अधिकतर कुरियर होते हैं. ये आरोपी निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े पाए गए हैं. तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहन अधिकतर किराए के होते हैं. वाहन मालिकों तक पहुंचने में पुलिस को कम सफलता मिल रही है. कई मामलों में वाहन राजसात कर दिए जाते हैं. विशेष अदालत में एनडीपीएस के करीब 50 मामले लंबित हैं. ज्यादातर मामलों में गवाहों के मुकरने से आरोपियों को राहत मिल जाती है. महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित, करीब 5 प्रतिशत पाई गई है.
बस्तर – मौसम की बेरुखी से सूखा महुआ सीजन
बस्तर में वनों के घटते रकबे का असर अब ग्रामीण आजीविका पर दिखने लगा है. महुआ फूल संग्रहण का सीजन इस बार पूरी तरह फीका रहा. ग्रामीणों का कहना है कि इस साल महुआ फूल गिरा ही नहीं. बारिश न होने के कारण महुआ में कली बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. ग्रामीण महिलाएं इसे सीधा आर्थिक नुकसान बता रही हैं. महुआ और इमली पर ही कई परिवारों की सालभर की जरूरतें निर्भर रहती हैं. हालांकि इमली की आवक बाजारों में सामान्य बनी हुई है. दो साल पहले फूड ग्रेड महुआ संग्रहण की पहल हुई थी. लेकिन बाद में इसकी खरीदी बंद हो गई. वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है..ग्रामीणों ने मौसम और वन संरक्षण पर चिंता जताई है. प्रशासन से वैकल्पिक सहायता की उम्मीद की जा रही है.
कोंडागांव – कागजों में मजबूत, ज़मीन पर उखड़ती सड़क
कोंडागांव जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क सवालों में है. बटराली से होनहेड तक 12.5 किलोमीटर लंबी सड़क हाल ही में बनी है. करीब ढाई करोड़ की लागत से बनी सड़क एक हफ्ते में ही उखड़ने लगी. हाथ लगाने भर से डामर निकल रहा है. ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सात साल के इंतजार के बाद भी टिकाऊ सड़क नहीं मिल पाई. आरोप है कि घटिया निर्माण कर सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ. काम विभाग को सूचना दिए बिना शुरू किया गया था. निरीक्षण में डामरीकरण से पहले सफाई नहीं होने की बात सामने आई. कार्यपालन अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी किया है. मेंटेनेन्स और रिन्यूअल के निर्देश दिए गए हैं. ग्रामीण उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
कोंडागांव – नगर में गौवंश सुरक्षा व्यवस्था बेपटरी
कोंडागांव नगर में गौवंश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. गली-मोहल्लों में घायल और बीमार गौवंश खुलेआम पड़े मिल रहे हैं. त्वरित उपचार की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिख रही. शुक्रवार शाम एक गौवंश गंभीर हालत में मिला. वह उठने तक में असमर्थ था. पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क के बाद भी देर हुई. अंततः स्थानीय लोगों ने गौवंश को कंधों पर उठाया. पशु चिकित्सालय तक पहुंचाकर इलाज कराया गया. घटना ने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी. गौ सेवकों में नाराजगी देखी गई.स्थायी रेस्क्यू व्यवस्था की मांग तेज हो गई है. नगर में गौवंश संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई जा रही है.
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