कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को भारी हंगामे की स्थिति बनी रही। राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, विशेषकर बलात्कार और हत्या की हालिया घटनाओं को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सरकार को जमकर घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार से जवाब की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण सदन के भीतर तीखी नोकझोंक और गतिरोध देखने को मिला।

​राबड़ी देवी और अशोक चौधरी के बीच तीखी झड़प

​विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान माहौल उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। विपक्षी सदस्य महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को विफल बता रहे थे, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा प्रतिवाद किया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस तीखी झड़प के कारण सदन की गरिमा पर भी सवाल उठे और अंततः हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

​मंत्री अशोक चौधरी का पलटवार

​सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा:
​सदन नियमावली और कायदे-कानून से चलता है, लेकिन विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। ये लोग हर विषय पर सिर्फ हंगामा करना जानते हैं।

​नीट (NEET) छात्रा की हत्या के मामले पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक पेचीदा (Complicated) मामला है। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष ने ही इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग की थी और सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत इसकी सिफारिश कर दी। अब जब जांच चल रही है, तब भी ये लोग राजनीति कर रहे हैं।

​निजी हमले और तल्ख टिप्पणी

​अशोक चौधरी ने राबड़ी देवी का नाम लिए बिना उन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी ही बेटी और बहू को न्याय नहीं दिला सके, वे आज बिहार की महिलाओं की सुरक्षा की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना करार दिया।