अगर आप दिल्ली में रहते हैं और इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदने से सिर्फ इसलिए हिचक रहे हैं कि चार्जिंग कहां करेंगे, तो अब आपकी यह चिंता जल्द दूर होने वाली है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2026 तक का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है।

सरकारी योजना के मुताबिक, शहर के हर प्रमुख रिहायशी, व्यावसायिक और सार्वजनिक इलाके में चार्जिंग की सुविधा बढ़ाई जाएगी। इसके तहत मॉल, मार्केट, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, पार्किंग एरिया, मेट्रो स्टेशन और हाउसिंग सोसाइटीज़ में चार्जिंग पॉइंट्स लगाने पर जोर रहेगा।

एक साल में लगेंगे 7,000 नए चार्जिंग प्वाइंट

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 2026 के अंत तक करीब 7,000 नए पब्लिक EV चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल राजधानी में 8,998 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद हैं, लेकिन सरकार की योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 16,070 तक पहुंचाई जाएगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आ रही चार्जिंग से जुड़ी बाधा को दूर किया जा सके।

अभी भी है 75% की भारी कमी

भले ही दिल्ली सरकार EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी में जुटी हो, लेकिन मौजूदा हालात में मांग और सप्लाई के बीच बड़ा गैप बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुल 36,177 चार्जिंग प्वाइंट्स की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा व्यवस्था इस लक्ष्य से काफी पीछे है। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में अभी करीब 75.2 फीसदी यानी लगभग 27,179 चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है।

हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार और एजेंसियां इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही हैं। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर 66 नए चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने का प्रस्ताव है, जबकि आनंद विहार और न्यू अशोक नगर जैसे RRTS स्टेशनों पर 6-6 चार्जिंग प्वाइंट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि इन कदमों से सार्वजनिक स्थानों पर EV चार्जिंग की सुविधा बेहतर होगी और लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भरोसा बढ़ेगा।

पड़ोसी फेल, दिल्ली पास

NCR में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात तो हो रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दिल्ली ने बाकी शहरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा, गुड़गांव और फरीदाबाद की हालत बेहद खराब है, जबकि दिल्ली EV चार्जिंग के मामले में ‘किंग’ बनकर उभरी है।

रिपोर्ट बताती है कि गुड़गांव और फरीदाबाद में सरकारी जमीन पर एक भी पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद नहीं है। वहीं नोएडा में सिर्फ 69 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट्स हैं, जबकि यहां कम से कम 150 प्वाइंट्स की जरूरत बताई गई है। स्थिति गाजियाबाद में भी कुछ खास बेहतर नहीं है, जहां 126 चार्जिंग प्वाइंट्स मौजूद हैं, लेकिन वास्तविक जरूरत करीब 450 प्वाइंट्स की है।

बैटरी स्वैपिंगपर भी बड़ा जोर

अगर आपके पास बैटरी स्वैपेबल इलेक्ट्रिक गाड़ी है, तो यह खबर आपके लिए भी राहत लेकर आई है। दिल्ली में फिलहाल 948 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन काम कर रहे हैं, जिन्हें 2026 के अंत तक बढ़ाकर 1,268 करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे खासतौर पर ई-रिक्शा, डिलीवरी व्हीकल और टू-व्हीलर यूज़र्स को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बैटरी चार्ज करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और कुछ ही मिनटों में बैटरी बदली जा सकेगी।

एक्सपर्ट की चेतावनी

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के अमित भट्ट का कहना है कि EV चार्जिंग को लेकर एक अहम सच्चाई अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। उनके मुताबिक 80 से 90 फीसदी चार्जिंग घर या ऑफिस में ही होती है, न कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर। असली समस्या यह है कि कई हाउसिंग सोसाइटियां और RWA लोगों को निजी चार्जर लगाने की अनुमति नहीं देतीं, जिससे EV अपनाने में बड़ी रुकावट पैदा होती है। अमित भट्ट का सुझाव है कि भारत को नॉर्वे की तर्ज पर ‘चार्ज करने का कानूनी अधिकार’ (Right to Charge) लाना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी तय पार्किंग में बिना प्रशासनिक अड़चनों के चार्जर लगा सके। उनका मानना है कि इससे EV अपनाने की रफ्तार पब्लिक चार्जिंग बढ़ाने से भी ज्यादा तेज हो सकती है।

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