हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने यह साबित कर दिया कि जब एक महिला ठान ले, तो गलत के खिलाफ सबसे पहले वही खड़ी होती है — चाहे सामने उसका अपना पति ही क्यों न हो। इंदौर के मल्हारगंज इलाके में रहने वाली एक अकाउंटेंट महिला ने अपने ही पति के खिलाफ ड्रग्स कारोबार की शिकायत कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। महिला का साफ कहना है — “पति से ज़्यादा मेरे लिए कानून ज़रूरी है।”

घर बना रखा था ड्रग्स का गोदाम

पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में बताया कि उसका पति घर में गांजा और पाउडरनुमा ड्रग्स की दर्जनों पुड़िया रखकर सप्लाई करता था। आरोप है कि वह महालक्ष्मी नगर स्थित पान दुकान के जरिए कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों तक नशा पहुंचा रहा था। घर में दो नाबालिग बच्चियां भी रहती हैं। मां का कहना है कि इस गंदे धंधे का असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था। विरोध करने पर पति और ससुराल वाले उसे चुप रहने की धमकी देते थे। 4 फरवरी को तो पति ने बेरहमी से मारपीट की, जिससे महिला की आंख के ऊपर 7–8 टांके आए।

मल्हारगंज पुलिस पर उठे सवाल

महिला ने पहले मल्हारगंज थाना में शिकायत की। पुलिस घर भी पहुंची, लेकिन आरोप है कि सामने रखे गांजा और ड्रग्स को जब्त नहीं किया गया, न ही एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई की गई।

वीडियो बनाया, सीधे कमिश्नर को भेजा सबूत

पीड़िता ने सोशल मीडिया पर चल रही नशामुक्ति मुहिम देखकर हिम्मत जुटाई। 9 फरवरी को पति के घर से बाहर होने पर उसने घर में रखे ड्रग्स का वीडियो बनाया और सीधे पुलिस कमिश्नर इंदौर कार्यालय को भेज दिया। शिकायत मिलते ही कमिश्नर कार्यालय सक्रिय हुआ।

दूसरे थाने की टीम ने मारी दबिश

कमिश्नर के निर्देश पर विजय नगर ज़ोन के माध्यम से लसूड़िया थाना पुलिस ने मल्हारगंज थाना क्षेत्र में ही दबिश दी। देर रात घर से भारी मात्रा में गांजा और ड्रग्स की पुड़िया जब्त की गई और आरोपी पति को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई के बाद मल्हारगंज थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वकीलों ने कहा – पत्नी ने निभाया असली फर्ज

पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि महिला ने “पत्नी धर्म” से ऊपर कानून को रखा, जिससे कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद होने से बच सकती है। दूसरी ओर डॉ रूपाली राठौर ने बताया कि पीड़िता उनके पास आई थी और पूरे मामले के सबूत के साथ शिकायत कमिश्नर तक पहुंचाई गई, जिस पर तुरंत मदद मिली।

नशामुक्ति मुहिम बनाम जमीनी ढिलाई

एक तरफ शहर में नशे के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर महिला हिम्मत न दिखाती, तो यह धंधा यूं ही चलता रहता। यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सिस्टम के दो चेहरों की कहानी है —एक तरफ कार्रवाई करने वाला कमिश्नर कार्यालय, दूसरी तरफ शिकायत के बाद भी चुप बैठा स्थानीय थाना। और इस पूरी कहानी की सबसे मजबूत किरदार — एक मां, जिसने अपने बच्चों और शहर को नशे से बचाने के लिए अपने ही पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

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