कुंदन कुमार/ पटना। मंगलवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, राजद (RJD) के विधान पार्षदों ने पिछले दिनों हुए विवादों को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सदन का माहौल गरमा गया। राजद सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। स्थिति को अनियंत्रित होते देख सभापति ने कड़ा रुख अपनाया और विपक्षी एमएलसी को पूरे दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया। मार्शलों की मदद से विपक्षी सदस्यों को सदन से बाहर निकाला गया।
अशोक चौधरी बनाम सुनील सिंह
सदन के भीतर जदयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी और राजद के सुनील सिंह के बीच तीखी व्यक्तिगत बहस देखने को मिली। अशोक चौधरी द्वारा तुम क्या हो कहे जाने पर सुनील सिंह भड़क गए और वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।
बाद में मीडिया से बात करते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने राजद पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा-
राजद के विधान पार्षद मुझे उंगली दिखाकर बात कर रहे थे और मुझ पर अभद्र टिप्पणी की गई। राजद के लोग सदन में वही पुरानी ‘तेल पिलावन, लाठी घुमावन’ वाली संस्कृति वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं एक दलित मंत्री हूं, शायद इसी सोच के साथ वे मेरे प्रति ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। राजद पूरी तरह से दलित विरोधी है।
भारत माता की जय और विपक्ष का वॉकआउट
दूसरी ओर, विधानसभा में भी स्थिति तनावपूर्ण रही। मंत्री नितिन नवीन के स्वागत के दौरान सदन में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
इसी बीच, भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों के मुद्दे पर ‘कार्य स्थगन प्रस्ताव’ पेश किया। जब सरकार की ओर से इस पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय नारेबाजी और दमन की राजनीति कर रही है।
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