प्रमोद कुमार/ कैमूर। बिहार के कैमूर जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (MDA) कार्यक्रम के तहत जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य जिले की लगभग 13,01,509 की आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाओं से आच्छादित करना है।
घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे स्वास्थ्यकर्मी
कैमूर के सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर अपनी निगरानी में दवा खिलाएंगी। इसके अलावा विभिन्न बूथों पर भी दवा सेवन का प्रबंध किया गया है। अभियान के दौरान मुख्य रूप से डीईसी (DEC) और अल्बेंडाज़ोल की खुराक दी जाएगी।
इन लोगों को नहीं लेनी है दवा
स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अभियान के तहत निम्नलिखित श्रेणियों को दवा नहीं दी जाएगी:
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
गर्भवती महिलाएं।
गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।
भ्रांतियां दूर करने की अपील और सुरक्षा तंत्र
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं है। फिर भी, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) को अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे बिना किसी डर के दवा का सेवन करें क्योंकि फाइलेरिया विषैले मच्छरों के काटने से होने वाली एक लाइलाज बीमारी है, जिससे बचाव ही एकमात्र समाधान है।
अभियान की अवधि और क्षेत्र
यह अभियान 10 फरवरी से शुरू होकर 27-28 फरवरी तक चलेगा। हालांकि, जिले के भभुआ, मोहनिया और दुर्गावती क्षेत्रों को इस चरण में शामिल नहीं किया गया है। पूरे राज्य में करोड़ों लोगों को लक्ष्य बनाकर चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संक्रमण की चेन को तोड़ना और फाइलेरिया के भविष्य के मामलों को शून्य पर लाना है।
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