कुमार इंदर, जबलपुर। “मध्य प्रदेश के सरकारी वकील पैनलों में अब एक नई तस्वीर नजर आएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि, एमपी एडवोकेट जनरल (AG) ऑफिस में ‘मार्जिनलाइज़्ड रिप्रजेंटेशन’ यानी हाशिए पर रहने वाले समुदायों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।” सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि SC, ST, OBC और महिला वकीलों को AG ऑफिस में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले।

किन पदों पर होगा असर

यह नियम असिस्टेंट एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल, सरकारी वकील और पैनल लॉयर्स और महिला वकील की नियुक्तियों पर लागू होगा। दरअसल, ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर की है, जिसमें याचिकाकर्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट वरुण सिंह ठाकुर ने दलील दी कि, मध्य प्रदेश महाधिवक्ता कार्यालय में भी ‘मार्जिनलाइज़्ड रिप्रजेंटेशन’ होना चाहिए।

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दलील दी गई कि, कोर्ट में ‘मार्जिनलाइज़्ड रिप्रजेंटेशन’ न होने से इन समुदायों की तरफ से पैरवी करने में पक्ष पात का आरोप लगता है। सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि, SC, ST और OBC के वकीलों का रिप्रजेंटेशन होने से इस वर्ग से आने वाले लोगों की बात और मजबूती के साथ रखी जा सकती है।

हाईकोर्ट की सभी बेंचों में लागू होगा फैसला

​सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश मध्य प्रदेश हाई कोर्ट- जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ के साथ-साथ दिल्ली स्थित एमपी ऑफिस पर भी प्रभावी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

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“न्याय के सर्वोच्च मंदिर से निकली इस गूंज ने मध्य प्रदेश की प्रशासनिक नियुक्तियों में हलचल तेज कर दी है। अक्सर सरकारी वकील पैनलों में विविधता की कमी पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य कर दिया है। ​अदालत का मानना है कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों और महिलाओं की भागीदारी से न केवल सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि समाज के हर वर्ग को कानूनी प्रतिनिधित्व का अहसास होगा।

अब एडवोकेट जनरल ऑफिस को अपनी नई नियुक्तियों में योग्यता के साथ-साथ सामाजिक विविधता का भी पूरा ध्यान रखना होगा। ​यह फैसला केवल पदों को भरने के बारे में नहीं है, बल्कि कानूनी पेशा (Legal Profession) में जो ‘कास्ट और जेंडर गैप’ है, उसे पाटने की एक बड़ी कोशिश है। इससे आने वाले समय में अन्य राज्यों के AG ऑफिसों पर भी ऐसा ही दबाव बढ़ सकता है।

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