कुंदन कुमार/ पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के समय सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। सरकार द्वारा दिए गए जवाबों से असंतुष्ट होकर विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार शिक्षक बहाली की प्रक्रिया और रिक्तियों की संख्या को लेकर सदन को गुमराह कर रही है।
संदीप सौरव का तंज
भाकपा-माले के विधायक संदीप सौरव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति परीक्षा) के बहाली मुद्दे पर सरकार सदन में गलत आंकड़े पेश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले बड़ी संख्या में बहाली की बात कही गई थी, लेकिन अब केवल 30,000 पदों पर ही बहाली की चर्चा हो रही है। सौरव ने विशेष रूप से कंप्यूटर साइंस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस विषय में 26,000 पद खाली पड़े हैं, फिर भी सरकार उन पर नियुक्ति करने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
सड़क से सदन तक जारी रहेगा आंदोलन
विधायक ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार को बिहार के बेरोजगार युवाओं की कोई चिंता नहीं है। जब अभ्यर्थी अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, तब सरकार केवल ‘गिनती’ गिनाने में व्यस्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक अभ्यर्थियों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जा रही है और जब तक उनकी विधिवत बहाली नहीं हो जाती, तब तक माले और संपूर्ण विपक्ष उनके साथ खड़ा रहेगा। इस बहिष्कार ने एक बार फिर बिहार में शिक्षक नियोजन की जटिलताओं और युवाओं के आक्रोश को उजागर कर दिया है।
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