फाल्गुन में पढ़ने वाली महाशिवरात्रि का हर हिंदू भक्त को बेसब्री से इंतजार है। इस दिन महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए हर कोई अपने-अपने तरह से पूजा अर्चना और अभिषेक करने की तैयारी में है, ऐसे में यह बहुत ही आवश्यक है कि ऐसे मुहूर्त में आप पूजा करें जो आपको उत्तम से भी उत्तम फलदायक हो। इसके लिए कहा जाता है कि निशीथ काल का समय बेहद शुभ होगा। साथ ही यह महाशिवरात्रि कई दुर्लभ संयोग से पूर्ण है।
निशीथ काल का समय
15 फरवरी की रात लगभग 12 बजकर 09 मिनट से लेकर 1 बजकर 01 मिनट तक का समय विशेष पूजा के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान शिवलिंग पर अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि आधी रात का यह समय शिव साधना के लिए सबसे पवित्र होता है।

बना रहा कई दुर्लभ संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर पांच अद्भुत राजयोग एक साथ बन रहे हैं। बुध और शुक्र के संयोग से लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। बुध और सूर्य के मेल से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। सूर्य और शुक्र के मिलन से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में शनि शश महापुरुष राजयोग बना रहे हैं। साथ ही सूर्य बुध शुक्र शनि और राहु के एक साथ होने से पंचग्रह राजयोग का निर्माण हो रहा है।
इन सभी शुभ योगों का एक साथ बनना अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार यह संयोग आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है। कई राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी साबित हो सकता है।
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