गया। जिले में प्रशासनिक निरंकुशता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मोहनपुर अंचल के अंचलाधिकारी (CO) पर न केवल 50,000 की रिश्वत लेने का आरोप लगा है, बल्कि उन पर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और डिप्टी सीएम तक के निर्देशों की अवहेलना करने के भी गंभीर आरोप हैं।

​रिश्वत लेकर मुकर जाने का आरोप

​बघलती गांव के पीड़ित अशोक कुमार सिंह का दावा है कि जमीन विवाद सुलझाने के एवज में सीओ ने उनसे 50 हजार रुपये लिए। आरोप है कि बाद में विपक्षी पार्टी से अधिक रकम मिलने पर सीओ अपने वादे से मुकर गए। पीड़ित के पास इस कथित लेन-देन और बातचीत की मोबाइल रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया गया है।

​संवैधानिक आदेशों की अवहेलना

​जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने परिवाद संख्या 435110111012509847 पर सुनवाई करते हुए 24 जून 2025 को पीड़ित के पक्ष में आदेश जारी किया था। आदेशानुसार, पीड़ित को अपनी जमीन पर निर्माण की अनुमति मिलनी थी, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि सीओ ने स्पष्ट कह दिया कि वे इस आदेश को नहीं मानते। हद तो तब हो गई जब बोधगया में आयोजित डिप्टी सीएम के संवाद कार्यक्रम (28 जनवरी 2026) में शिकायत के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

​जेल भेजने और हत्या की साजिश का डर

​पीड़ित परिवार का आरोप है कि भू-माफिया और सीओ की कथित सांठगांठ के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अशोक सिंह ने आशंका जताई है कि उन्हें झूठे केस में फंसाकर जेल भेजा जा सकता है या उनकी हत्या करवाई जा सकती है।

​अधिकारी का पक्ष

​जब इस संबंध में सीओ रंजीत कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने आरोपों को नजरअंदाज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को कमिश्नर कोर्ट में अपील करनी चाहिए। इधर-उधर शिकायत करने से कुछ हासिल नहीं होगा। फिलहाल, इस मामले ने सरकारी सिस्टम में बैठे ‘दलालों’ और अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।