Rajasthan News: दौसा से कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा और तहसीलदार गजानंद मीणा के बीच हुई बदसलूकी का मामला अब राजस्थान विधानसभा की दहलीज पर पहुंच गया है। विधायक बैरवा द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के नोटिस को विधानसभा स्पीकर ने मंजूर कर लिया है, जिसके बाद अब दोषी अधिकारी पर निलंबन या इंक्रीमेंट रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए विधायक दीनदयाल बैरवा ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा, तहसीलदार की क्या औकात कि वह एक विधायक से उलझ जाए? उसे मुख्यमंत्री और भाजपा का राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है, इसीलिए अब तक कार्रवाई नहीं हुई। बैरवा ने यह भी आरोप लगाया कि दलित विधायक होने के कारण उनके साथ और क्षेत्र के दलितों के साथ प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव और बदसलूकी की जा रही है।
ताज्जुब की बात यह रही कि विधानसभा स्पीकर के बुलावे के बावजूद दौसा कलेक्टर उपस्थित नहीं हुए, जिसे बैरवा ने ब्यूरोक्रेसी के हावी होने का प्रमाण बताया। अब यह मामला विशेषाधिकार हनन कमेटी के पास जाएगा, जहाँ तहसीलदार गजानंद मीणा को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत 2 फरवरी को दौसा में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी। मौके पर पहुंचे विधायक और तहसीलदार के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में तहसीलदार विधायक से यह कहते सुने गए थे कि इस जमीन का मालिक मैं हूं। विधायक का आरोप है कि तहसीलदार भू-माफियाओं से मिले हुए हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अब इस मामले में विधानसभा की कमेटी गवाहों और वीडियो सबूतों की जांच करेगी।
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