दिल्ली नगर निगम ने 2026-27 के लिए इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। सदन के नेता प्रवेश वाही ने शुक्रवार को लगभग 17,583 करोड़ रुपए के बजट का अनुमोदन किया, जिसमें गलियों, मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। पार्षदों को अपने-अपने वार्ड में विकास कार्य के लिए दो-दो करोड़ दिए गए हैं, जबकि प्रत्येक वार्ड की 20 आरडब्ल्यूए को 25,000 रुपए प्रति संस्था वितरित किए जाएंगे।

बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के 49 पूर्णत: ग्रामीण घोषित गांवों के घरों को गृहकर से पूरी तरह छूट दी गई है। शहरीकृत गांवों में मूल निवासी 200 मीटर तक के आवासीय भवनों के लिए संपत्ति कर माफ किया जाएगा। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 5,000 सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा और निगम के बेड़े में 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और 1,000-लीटर पिकर मशीनें शामिल की जाएंगी। भलस्वा और ओखला कचरा पट्टी को 2026 और गाजीपुर कचरा पट्टी को 2027 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

सफाई और पर्यावरण प्रबंधन के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। निगम कर्मचारियों और पार्षदों के लिए पहली बार कैशलैस अस्पताल योजना लागू की गई है। निगम विद्यालयों की मरम्मत के लिए 22 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक वार्ड में विधवा, एकल मां और दिव्यांग महिलाओं को आर्थिक सहायता, सिलाई मशीन और साइकिल दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि बजट का उद्देश्य दिल्लीवासियों को घर के पास बुनियादी स्वास्थ्य, सफाई और विकास की सुविधाएं देना है। पार्षदों और स्थानीय आरडब्ल्यूए के सहयोग से गलियों-मोहल्लों तक विकास पहुंचाया जाएगा और जनता को बेहतर जीवन की राह दिखेगी। इस बजट के साथ दिल्ली नगर निगम ने विकास और जनता के कल्याण में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

दिल्ली नगर निगम के बजट सत्र में पेश किए गए 2026-27 के बजट पर आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को कड़ी आपत्ति जताई। निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा शासित निगम का बजट जन सरोकारों से दूर और केवल दिखावटी है। उनके अनुसार, बजट में कूड़े के पहाड़, सफाई, एमटीएस कर्मियों और आवारा कुत्तों जैसी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है। अंकुश नारंग ने कहा कि निगम चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कई वादे किए थे, लेकिन बजट में एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। यह जनता का बजट नहीं, बल्कि कागजी बजट है जो कॉमेडी शो जैसा लग रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट जनता की प्राथमिकताओं से कोसों दूर है।

जहां आम जनता की चिंता कचरा पट्टियों और सफाई की है, वहां बजट में कोई ठोस योजना नहीं दिखाई दी। विपक्ष ने यह भी कहा कि बागवानी, पार्कों की सफाई, नए माली और पेड़ों की छंटाई जैसी जरूरतों पर बजट में ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना था कि जनता के दैनिक जीवन से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर बड़े-संख्या के आंकड़ों और खर्चों पर जोर देना जनता की समस्याओं का समाधान नहीं है।

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