कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। देवों के देव महादेव का ग्वालियर में एक ऐसा स्थान है, जहां उन्हें मजिस्ट्रेट महादेव कहा जाता है। गिरगांव में बसा मजिस्ट्रेट महादेव का यह मंदिर खास है, क्योंकि यहां भगवान शिव खुद जज बनते हैं और विवादों का फैसला सुनाते हैं। दूर-दूर से आने वाले फरियादी यहां महादेव की शपथ खाकर न्याय पाते हैं। 

7 दिन में मिलता है न्याय

आम से लेकर खास सभी न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं, सालों साल तक न्याय के लिए भटकते हैं। लेकिन ग्वालियर में एक ऐसी भी अदालत है जहां न्याय पाने के लिए सालों नहीं सिर्फ 7 दिन का इंतजार करना पड़ता है। जज भी कोई आम नही स्वयं भगवान भोलेनाथ होते हैं। सभी पक्षों को न्याय के लिए भगवान भोलेनाथ की धरम उठानी यानी कसम खानी होती है। 

1000 साल पुराना है मंदिर

मान्यता है कि ग्वालियर भिंड रोड पर बना यह मन्दिर स्वयम्भू होने के साथ ही 1000 साल प्राचीन है। भगवान भोलेनाथ का यह मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। ऐसे में आस्था के साथ न्याय की उम्मीद ने उन्हें मजिस्ट्रेट बना दिया। आज छोटे से लेकर बड़े-बड़े मामले मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में आते हैं, जो पक्षों के द्वारा उठाई गई धरम यानी कसम के जरिये हल होती है।

आखिर कैसे और कौन उठा सकता धरम?

– सुबह 9:00 से लेकर शाम 5:00 तक ही धर्म होगा
– 20 साल से कम उम्र के बालक और महिलाओं का धर्म मान्य नहीं होगा
– ₹20000 से कम रकम का धर्म नहीं मान्य होगा
– बिना पंचनामा बने धर्म मान्य नहीं होगा

मजिस्ट्रेट महादेव करते हैं सच और झूठ का फैसला

मंदिर के मुख्य महंत अमर सिंह का कहना है कि गिरगांव के महादेव मजिस्ट्रेट महादेव कहलाते हैं। यहां सच और झूठ का फैसला होता है। अगर कोई झूठ बोलेगा तो उसका परिणाम मजिस्ट्रेट महादेव देते हैं। अभी तक कई पंचायत मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में हो चुकी है, जिनके परिणाम भी सामने आए हैं। बड़े-बड़े विवाद आसानी से हल हो गए। पुलिस भी मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में हुए निर्णय का सम्मान करती है।

आस्था, श्रद्धा और विश्वास का गहरा असर

भक्तों का मानना है कि मजिस्ट्रेट महादेव की यह कचहरी केवल विवाद सुलझाने की जगह नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन में नैतिकता और सच्चाई बनाए रखने का माध्यम भी है। यह मंदिर और इसकी कचहरी उस समय के लिए भी प्रेरणा है। जब न्यायालय में न्याय की उम्मीद लंबी प्रक्रियाओं और कानूनी जटिलताओं में उलझ जाती है, उस जगह पर महादेव की अदालत की आस्था, श्रद्धा और विश्वास का असर इतना गहरा है कि लोग महादेव के सामने खड़े होकर कसम खाकर विवादों के हल की उम्मीद करते हैं। बच्चा गुम हों जाने पर एक दूसरे पर लगाए गए आरोपो से जुड़े मामले में पति-पत्नी ने मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में परिवार के साथ कसम खाई और भरोसा जाहिर किया कि उन्हें जरूर न्याय मिलेगा।

आगरा से आए शख्स को मिला न्याय

मजिस्ट्रेट महादेव की महिमा इतनी दूर-दूर तक है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी लोग अपने विवादों को सुलझाने के लिए उनकी अदालत में पहुंचते हैं। आगरा के रहने वाले हेमसिंह कुशवाह ने बताया कि उनके पारिवारिक विवाद का हाल जब कहीं नहीं मिला तो वह मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में पहुंचे थे जहां मामला सुलझाया गया। तभी से वह साल में एक बार जरूर मजिस्ट्रेट महादेव के दर्शन करने आते हैं।

भगवान भोलेनाथ की महिमा और भक्तों में उनकी अटूट श्रद्धा ने उन्हें मजिस्ट्रेट महादेव बनाया है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि न्याय और सच्चाई का प्रतीक भी बन गया है।

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