दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। विश्व प्रसिद्ध सेठानी घाट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्री काले महादेव के नाम से जाना जाता है। श्रीकाले महादेव के नाम से विख्यात यह मंदिर लगभग 300 वर्ष से ज्यादा पुराना है। इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना कब हुई, किसने की ये बात कोई नहीं जानता। नर्मदा तट के किनारे स्थित शिव मंदिरों में यह एक प्रमुख और चमत्कारी शिव मंदिर है। यह मंदिर प्राचीन और अद्भुत मंदिर है। बताया जाता है कि यहां गर्भगृह में विराजित शिवलिंग के पास से प्राचीन काल से ही ओम की ध्वनि सुनाई देती है। फर्श पर कान लगाने पर डमरू की आवाज भी सुनाई देती है। मान्यता के चलते दूर-दराज से भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।

अभिषेक पटवा ने बताया कि श्री काले महादेव मंदिर में दो जोत 12 महीने लगातार जलती है। यह वही जोत है जो उज्जैन के महाकाल मंदिर से प्रज्वलित कर के इस मंदिर में लाई गई, जो अखण्ड जोत की तरह इस मंदिर मे जल रही है। एक महीने में लगभग 30 किलो घी लगता है। इसके साथ ही काले महादेव के श्रृंगार के कपड़े भी यहां उसी जगह से आते हैं, जहां उज्जैन के काले महादेव के कपड़े बनते हैं।

यहां से आता है श्रृंगार का सामान

इसके साथ ही श्रृंगार का सामान जोधपुर से, बंगाल से आंख और काले महादेव के श्रृंगार करने के लिए भांग उज्जैन और देवास से आती है। इस मंदिर की ध्वजा हर महीने पूर्णिमा पर बदली जाती है। यह ध्वजा उसी स्थान से आती है, जहां महाकाल की ध्वजा तैयार होती है। काले महादेव का श्रृंगार महाकाल की तर्ज पर ही किया जाता है।

200 से 300 साल पुराना मंदिर

पं. सौरभ शर्मा और अभिषेक पटवा ने बताया कि शिवलिंग कितना प्राचीन है, यह किसी को ज्ञात नहीं, लेकिन बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 200 से 300 साल पहले से यहां मंदिर का अस्तित्व है। तब एक कच्चा मंदिर हुआ करता था। उस मंदिर के ऊपर टीन शेड डला हुआ था। वर्ष 2013 की बाढ़ में टीन शेड बह गया था। तब समिति से जुड़े लोगों ने भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया। इसके बाद श्री काले महादेव मंदिर सेवा समिति के लोगों की ओर यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।

ये है आरती का समय

श्रीकाले महादेव मंदिर में प्रतिदिन महाकाल के बारह रूपों के दर्शन के लिए भीड़ लगी रहती है। प्रतिदिन महाकाल को देखने के लिए भक्तों का मेला सा लगा रहता है। इसके साथ ही 7 नदियों के जल से महादेव का जलाभिषेक होता है। अभिषेक पटवा ने बताया कि सुबह 4 बजे काले महादेव मंदिर में भस्मारती होती है। यह भस्म समिति के 4-5 लोग देर रात 12 बजे शमसान से ताजी भस्म लेकर आते है। आरती प्रातः 8 बजे, फिर संध्या आरती रात 8 बजे और शयन आरती रात 11 बजे बजे होती है। सुबह 11:30 बजे भोग आरती होती है।

हर मनोकामना होती है पूरी

शहर के लोगों में श्री काले महादेव में गहरी आस्था है। पिछले कई वर्षों से यहां दर्शन के लिए लोग रोजाना आते हैं। यहां पूजा अर्चना के बाद ही उनकी दिनचर्या की शुरुआत होती है। चाहे लाख काम क्यों ना हो, मंदिर में गैरहाजिरी नहीं होती। काले महादेव के दर्शन से एक अलग ही अनुभूति होती है, सभी काम बन जाते हैं। मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा-अर्चना व दर्शन करने आता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

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