रायपुर। अभनपुर तहसील के टेकारी में मृत व्यक्ति की जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर जमीन की रजिस्ट्री करवाने का मामला उजागर हुआ है. राजस्व विभाग में ये मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. पूरे प्रकरण में अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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जानकारी के अनुसार, टेकारी की जमीन को अपने नाम चढ़ाने मृतक के परिजनों आवेदन दिया तो तत्कालीन तहसीलदार सत्येन्द्र शुक्ला ने दोनों बार यह बताते हुए खारिज कर दिया कि वसीहत प्राप्तकर्ता की मृत्यु हो जाने के कारण प्रकरण खारिज किया जाता है. इसके बावजूद वर्तमान तहसीलदार सृजन सोनकर ने आवेदन स्वीकार कर जमीन को आवेदक के नाम चढ़ाने का आदेश कर दिया.

जबकि, ऑनलाइन सिस्टम में संबंधित खसरा के बारे में क्लिक करने पर ये जानकारी साफ हो जाती है कि पूर्व में जमीन की क्या स्थिति थी. यहां तक पटवारी रिकॉर्ड में ये भी लिखा था कि जमीन ऑनलाइन व ऑफलाइन में अलग-अलग नामों पर दर्ज है. लेकिन मनमाने तरीके आदेश पारित करते हुए तहसीलदार ने जमीन आवेदकों के नाम चढ़ा दी.

दरअसल, शारदा वर्मा ने अपने बेट गुलाब वर्मा के नाम पर वसीहत लिखी थी. लेकिन बाद में गुलाब वर्मा की मृत्यु भी हो गई. धारा 105 वसीयत संपदा के मुताबिक यदि वसीयतदार वसीयतकर्ता का उत्तरजीवी नहीं है, तो वसीयत प्रभावी नहीं होगी. वसीयत में किसी अन्य व्यक्ति को देने की बात नहीं लिखी है. ये जानते हुए भी तहसीलदार सृजन सोनकर ने जमीन मृतक के वंशजों के नाम पर चढ़ा दी.

जानिए घटनाक्रम

टेकारी की लगभग एक एकड़ जमीन (खसरा नंबर 223/1 और 645/1) पहले से बोधनी वर्मा और शारदा वर्मा के नाम पर दर्ज है. (शारदा वर्मा की 23 अप्रैल 2021 को मृत्यु हो चुकी है.)

दस्तावेज के मुताबिक, इसी जमीन को 24 जून 2025 को अन्नू तारक के नाम पर रजिस्ट्री किया गया है. यानी जिस व्यक्ति का देहांत 2021 में हो चुका है उसे जिंदा बताकर 2025 में जमीन की रजिस्ट्री करवा दी गई.

रिकॉर्ड के मुताबिक अन्नू तारक ने दो सप्ताह के भीतर जमीन 3 जुलाई 2025 को कौशल और कपिल तरवानी को बेच दी. जिस शारदा वर्मा की 2021 में मृत्यु हो चुकी है. उन्होंने अपने बेटे गुलाब वर्मा के नाम पर 2018-19 में वसीयत लिखी थी.

गुलाब की मृत्यु 24 फरवरी 2024 को हो चुकी है. अब इनके वारिसानों की अपील पर तहसीलदार ने 20 नवंबर 2025 को इनके नाम चढ़ा दी.

वर्तमान रिकॉर्ड के मुताबिक ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन कौशल और कपिल तारवानी के नाम पर है. मैनुअल रिकॉर्ड में जमीन वर्मा के नाम पर है.