कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारी हंगामा देखने को मिला। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जदयू के विधायकों ने राजद से माफी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। विवाद की जड़ राजद विधायक द्वारा रामविलास पासवान के लिए इस्तेमाल किया गया बेचारा शब्द है, जिसे चिराग पासवान की पार्टी दलितों का अपमान बता रही है। मंगलवार को विधानसभा परिसर में लोजपा (आर) के विधायकों ने राजद की पहचान, दलितों का अपमान लिखे बैनर लेकर जोरदार नारेबाजी की।

​मंत्री संजय सिंह का पलटवार

​बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह ने राजद पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रामविलास पासवान सर्वमान्य नेता थे और वे कभी जातिवाद के पक्षधर नहीं रहे। उन्होंने कहा कि राजद अब इस मुद्दे पर जाति का कार्ड खेल रही है, जो पूरी तरह गलत है। राजद द्वारा मूर्ति लगाने की मांग पर संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि चिराग पासवान पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर यह मांग रख चुके हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि पटना में उपयुक्त स्थान पर रामविलास जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ऐसे में राजद का हंगामा सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए है।

​विधायक सर्वजीत का आरोप

​दूसरी ओर, राजद विधायक सर्वजीत ने अपनी सफाई देते हुए रामविलास पासवान को अपना आइकन बताया। हालांकि, उन्होंने इस विवाद को नया मोड़ देते हुए राजू तिवारी पर निशाना साधा। सर्वजीत ने कहा कि राजू तिवारी ब्राह्मण समाज से आते हैं, इसलिए उन्हें एक दलित बेटे का कद बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा विधानसभा परिसर में मूर्ति लगाने की मांग को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। फिलहाल, इस जुबानी जंग ने बिहार की सियासत में ‘दलित अस्मिता’ के मुद्दे को गरमा दिया है।