आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। शहर के वार्ड क्रमांक 1 में उस समय हड़कंप मच गया, जब खेतों की मेड़ और कच्ची जमीन पर बड़े जानवर के पंजों जैसे स्पष्ट निशान दिखाई दिए। सुबह-सुबह ग्रामीणों की नजर इन पगमार्क पर पड़ी तो देखते ही देखते पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। एहतियातन लोगों को फिलहाल खेतों में जाने से रोका जा रहा है, वहीं कई परिवारों ने अपने मवेशियों को भी खुले में छोड़ना बंद कर दिया है।

रहवासियों का कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आ जाती, खेतों में जाना खतरे से खाली नहीं है। लोगों के मुताबिक, निशान आकार में बड़े हैं और पहली नजर में बाघ या किसी बड़े शिकारी जानवर के पंजों जैसे प्रतीत होते हैं। खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ खेतों की ओर उमड़ पड़ी।
वन विभाग की सफाई: सिर्फ पगमार्क से पुष्टि नहीं

मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केवल पंजों जैसे निशानों के आधार पर बाघ या किसी बड़े हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
वन विभाग के अनुसार, यदि क्षेत्र में बाघ या तेंदुए जैसा बड़ा शिकारी जानवर मौजूद होता, तो उसके शिकार के अवशेष, खून के धब्बे या अन्य ठोस संकेत भी मिलते। फिलहाल ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। इसलिए विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी बिल्ली की पुष्टि
गौरतलब है कि वन विभाग ने पहले बस्तर जिले में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की थी। ऐसे में प्रथम वार्ड में मिले इन पगमार्क ने आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। फिलहाल अज्ञात जानवर की आमद की आशंका के चलते वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी गश्त की जा रही है ताकि किसी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रथम वार्ड के खेतों में दिखे ये निशान आखिर किस जानवर के हैं? क्या यह किसी जंगली जानवर की आवाजाही का संकेत है या फिर किसी अन्य कारण से बने निशान?
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