समुद्र में वर्चस्व की जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. कारण, चीन ने परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के निर्माण में तेजी लाते हुए अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. एक थिंक-टैंक की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच चीन ने अमेरिका से अधिक संख्या और अधिक टन भार वाली पनडुब्बियां लॉन्च की हैं, जिससे समुद्री शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है. ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (IISS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले पांच वर्षों में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के निर्माण में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है.
यह विकास वाशिंगटन के उस समुद्री दबदबे के लिए सीधा खतरा है, जो दशकों से निर्विवाद रहा है. रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2025 के बीच चीन ने 10 परमाणु पनडुब्बियां लॉन्च कीं, जबकि अमेरिका ने इसी अवधि में 7 पनडुब्बियां उतारीं. टन भार के लिहाज से भी चीन आगे रहा. चीन के 79,000 टन के मुकाबले अमेरिका का 55,500 टन.
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है. उसके पास 234 युद्धपोत हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना के पास 219. 2025 में विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ को शामिल किए जाने के साथ चीन ने अपनी समुद्री ताकत और बढ़ाई है.
IISS की ‘मिलिट्री बैलेंस 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की शुरुआत तक चीन के पास 12 सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां थीं. इनमें 6 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और 6 अटैक या गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं.
वहीं अमेरिका के पास कुल 65 पनडुब्बियां हैं, जिनमें 14 बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं. चीन के पास 46 पारंपरिक (डीजल-इलेक्ट्रिक) पनडुब्बियां भी हैं, जबकि अमेरिका के पास एक भी पारंपरिक पनडुब्बी नहीं है. अमेरिका नई कोलंबिया-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां भी बना रहा है, लेकिन यह कार्यक्रम कम से कम एक साल पीछे चल रहा है. पहली पनडुब्बी यूएस डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के 2028 तक डिलीवरी की उम्मीद है.
चीन अपने सहयोगी पाकिस्तान को भी आधुनिक नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां दे रहा है. पिछले दिसंबर चीन ने पाकिस्तान के लिए चौथी हैंगोर-क्लास पनडुब्बी ‘गाजी’ लॉन्च की.
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अपनी सालाना दो वर्जीनिया-क्लास अटैक पनडुब्बियां बनाने के लक्ष्य से पीछे चल रहा है. 2022 से अब तक अमेरिकी शिपयार्ड सालाना औसतन 1.1 से 1.2 पनडुब्बियां ही डिलीवर कर पाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार दूसरी ओर, चीन ने उत्तरी चीन में बोहाई शिपबिल्डिंग हेवी इंडस्ट्री के हुलुदाओ शिपयार्ड का बड़ा विस्तार किया है, जिससे परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण में तेजी आई है.
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