रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 व 22 फरवरी को रायपुर में किया जा रहा है.
दो दिनों तक आयोजित छह तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा. पहले दिन ई-जागृति, ई-फाइलिंग, ई – हियरिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, शिकायतों की स्वीकृति, क्षेत्राधिकार एवं प्रक्रिया संबंधी प्रावधान, डिजिटल एवं ई-कॉमर्स चुनौतियाँ, डार्क पैटर्न्स एवं भ्रामक विज्ञापन के साथ उपभोक्ता आयोग के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सुधार पर चर्चा होगी.

अगले दिन 22 फरवरी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में आवश्यक संशोधन के साथ उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता की आवश्यकता पर चर्चा होगी. समापन सत्र में खुला संवाद होगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में वैलेडिक्टरी (विदाई) सत्र आयोजित होगा.
दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, झारखण्ड, गोवा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा एवं उनके जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, 8 राज्यों के सचिवगण तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि इस कार्यशाला में भाग लेंगे.
छत्तीसगढ़ में निराकरण का प्रतिशत सौ से ज्यादा
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने यह बताया कि आगामी सप्ताह में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में एक अतिरिक्त पीठ एवं बेमेतरा जिले में जिला उपभोक्ता आयोग का शुभारंभ होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ राज्य के जिला उपभोक्ता आयोगों ने 2025 में 160 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण किया है, एवं राज्य उपभोक्ता आयोग के निराकरण का प्रतिशत 101.57 प्रतिशत रहा. प्रदेश के 16 जिला उपभोक्ता आयोगों में ई – हियरिंग की सुविधा भी प्रारंभ कर दी गई है.
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