द्वारका इलाके में साइबर ठगों ने आर्मी से रिटायर्ड 75 वर्षीय कैप्टन को निशाना बनाकर करीब 65 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने पहले परिचित बनकर फोन किया और धीरे-धीरे ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर बुजुर्ग को अपने जाल में फंसा लिया। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें ऑनलाइन निगरानी में रखा गया है। डर के माहौल में बुजुर्ग को किसी से बात न करने की हिदायत दी गई और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया।
ठगों के दबाव में आकर बुजुर्ग ने बैंक में जमा अपनी गाढ़ी कमाई की एफडी तुड़वाई और रकम अलग-अलग खातों में भेज दी। पैसे खत्म होने पर उन्होंने पड़ोसियों से उधार लेकर भी रकम ट्रांसफर की। इस तरह 38 दिनों में वह करीब 65 लाख रुपये साइबर अपराधियों को भेज चुके थे।
सेना से रिटायर्ड कैप्टन हैं पीड़ित
द्वारका इलाके में रहने वाले 75 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी कैप्टन नंदन सिंह से साइबर ठगों ने सुनियोजित तरीके से ठगी की। बुजुर्ग अपनी पत्नी देवकी के साथ यहां रहते हैं। बताया गया कि जब बुजुर्ग ने और पैसे देने से इनकार किया, तो ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया। खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें कहा गया कि वह एक गंभीर मामले में फंस गए हैं और उन्हें ऑनलाइन निगरानी में रखा गया है। इस धमकी से वह बेहद घबरा गए। डरे हुए नंदन सिंह ने तुरंत अपनी बेटी को कॉल कर पूरी बात बताई। इसके बाद परिवार को ठगी का शक हुआ और इस संगठित साइबर अपराध का भंडाफोड़ हो गया। परिजनों ने मामले की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
क्या है पूरा मामला
द्वारका में रहने वाले रिटायर्ड कैप्टन नंदन सिंह ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उनके फोन पर एक इंटरनेशनल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को “कुलदीप” बताया। इसी नाम का एक व्यक्ति करीब एक साल पहले उनके घर में किराएदार रह चुका था, इसलिए बुजुर्ग को शक नहीं हुआ। कॉलर ने कहा कि वह जल्द भारत लौटने वाला है और विदेश से कुछ पैसे भेजना चाहता है। भरोसा जीतने के लिए उसने निजी बातें भी बताईं, जिससे नंदन सिंह को लगा कि वह वही पुराना किराएदार है।
नंदन सिंह के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के बैंक खाते की जानकारी दे दी। कुछ समय बाद कथित कुलदीप ने कहा कि भारत आने की प्रक्रिया के लिए वीजा एजेंट को 4 लाख रुपये ट्रांसफर करने होंगे। इसके तुरंत बाद खुद को “वीजा एजेंट” बताने वाले व्यक्ति का भी फोन आ गया। बुजुर्ग ने बताया कि वह ऑनलाइन ट्रांसफर करना नहीं जानते थे, तो ठगों ने उन्हें पास की दुकान से पैसे ट्रांसफर कराने को कहा। भरोसे में आकर उन्होंने वैसा ही किया और रकम भेज दी। यहीं से साइबर ठगी का सिलसिला शुरू हुआ, जो बाद में लाखों रुपये तक पहुंच गया। पुलिस के अनुसार, ठगों ने पहले पहचान और भरोसे का जाल बिछाया, फिर अलग-अलग बहानों से पैसे ऐंठते गए।
झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर ठगे 65 लाख
द्वारका में रिटायर्ड आर्मी कैप्टन से साइबर ठगी के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। ठगों ने पहले परिचित बनकर भरोसा जीता, फिर झूठी कहानियां गढ़कर और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
एयरपोर्ट विवाद की कहानी से मांगे पैसे
पीड़ित नंदन सिंह के अनुसार, अगले दिन कथित “कुलदीप” का फोन आया कि एयरपोर्ट स्टाफ से उसकी बहस हो गई है, जिसके कारण उस पर भारी जुर्माना लगाया गया है। इसके बाद ठग ने एयरपोर्ट से जुड़ी कई मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे मंगवाने शुरू कर दिए। ठग ने भरोसा बढ़ाने के लिए फर्जी HSBC Bank की स्लिप भी भेजी, जिसमें दिखाया गया कि उसने पीड़ित के खाते में 14.25 लाख और 18.45 लाख रुपये ट्रांसफर किए हैं।
बैंक मैनेजर बनकर टैक्स के नाम पर वसूली
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को बैंक मैनेजर बताकर कॉल किया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय रकम आने पर टैक्स देना होगा। झांसे में आकर बुजुर्ग ने अपनी एफडी तक तुड़वा दी और पैसे ट्रांसफर कर दिए। यह सिलसिला करीब 38 दिनों तक चलता रहा।
पैसे देने से इनकार पर ‘साइबर क्राइम’ का डर
जब पीड़ित ने और पैसे देने से मना किया तो उन्हें मुंबई साइबर क्राइम कमिश्नर के नाम से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को अधिकारी बताकर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी और बचने के लिए 4.70 लाख रुपये की मांग की। पिता के कॉल करने पर बेटी ने तुरंत किसी को भी पैसे ट्रांसफर न करने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद वह अपने पति के साथ तुरंत पिता के घर पहुंची और राष्ट्रीय साइबर ठगी हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। परिवार ने द्वारका साइबर थाने में जाकर औपचारिक शिकायत दी। ठगी की रकम 65 लाख रुपये होने के कारण मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट को सौंप दिया गया है।
इंटरनेशनल रैकेट का शक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस साइबर ठगी के पीछे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हाथ होने की आशंका है। ठगों ने कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए और विदेशी नंबरों से कॉल भी की। जांच में यह भी सामने आया है कि पूरी रकम एक स्थानीय दुकानदार के जरिए ट्रांसफर करवाई गई थी, जिससे मामले की साजिश और गहरी होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या मैसेज पर भरोसा न करें और संदिग्ध स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।
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