(छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जन्मदिन 21 फरवरी पर विशेष संपादकीय)
राजा धर्म सर्वस्व करि जाना।
करइ प्रजा पर प्रेम प्रधाना।।
रामचरितमानस में उद्धृत यह चौपाई छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव का ठीक-ठीक प्रतिनिधित्व करती है। इस चौपाई का अर्थ है एक आदर्श राजा वही होता है जो धर्म को ही अपना सर्वस्व मानता है और अपनी प्रजा से निस्वार्थ प्रेम करना ही अपना मुख्य कर्तव्य समझता है। “राजधर्म” के सर्वोच्च आदर्श को दर्शाती है रामचरित मानस की यह चौपाई, जहां प्रजा का कल्याण ही राजा के लिए सर्वोपरि होता है।
इस चौपाई को पूरी तरह से अपने आचरण में उतारने वाले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री इस सत्य को भलीभाँति समझते हैं कि शासन करने का मतलब शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि न्याय, नीति और धर्म का पालन करना होता है। राज्य की जनता को उन्होंने कर वसूलने का साधन कभी नहीं समझा बल्कि वे पित्र तुल्य उनके हितों की चिंता करते हैं। आज 21 फरवरी को, उनके जन्म दिन के अवसर पर उनकी प्रेरक यात्रा पर एक बार फिर से दृष्टि डाली जानी चाहिए कि कैसे एक धरतीपुत्र राज्य का सफल मुख्यमंत्री बन जाता है। जशपुर जिले के बगिया गाँव में 21 फरवरी 1964 को जन्मे विष्णुदेव साय आज प्रदेश के चौथे और पहले आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में एक नई राजनीतिक तस्वीर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि उस विश्वास की जीत है जो मानता है कि यदि संकल्प अडिग हो तो साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भी असाधारण मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।

कृषक परिवार में जन्मे विष्णुदेव ने मात्र उच्चतर माध्यमिक तक शिक्षा प्राप्त की और फिर परिवार का हाथ बँटाने के लिए खेती-किसानी से जुड़ गए। माटी से उनका यही जुड़ाव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। सन 1989 में ग्राम पंचायत बगिया से पंच के रूप में उन्होंने राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया और 1990 में वे निर्विरोध सरपंच बने। यह उनकी लोकप्रियता और जनता का उन पर विश्वास का पहला सबूत था।
अविभाजित मध्यप्रदेश में तपकरा विधानसभा से दो बार विधायक बने साय ने विधायक के रूप मे जनसेवा की एक मजबूत नींव रखी। वर्ष 1999 से रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार चार बार सांसद चुने गए जिसने उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास को सिद्ध किया। सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने 13वीं से 16वीं लोकसभा तक क्षेत्रीय विकास और आदिवासी हितों को राष्ट्रीय मंच पर उठाया।सन 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में केंद्रीय इस्पात, खान, श्रम और रोजगार राज्य मंत्री के रूप में विष्णुदेव साय ने अपनी प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया। संगठन और सत्ता—दोनों में सफलता पूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले विष्णुदेव साय को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मार्गदर्शन और सान्निध्य मिला।

छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर विष्णुदेव साय ने 13 दिसंबर 2023 को एक नया इतिहास रचा। यह प्रदेश की आदिवासी अस्मिता और सामाजिक समरसता का सम्मान भी था और विष्णुदेव साय की राजनीतिक उपलब्धि भी थी। विधानसभा चुनाव में कुनकुरी सीट से 2023 में विजयी होकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आज भी जनता की पहली पसंद जमीनी नेतृत्व ही होती है।
बतौर मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों के हित में निर्णय, आदिवासी अंचलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में की जाने वाली निरंतर पहल, महिलाओं के सशक्तिकरण की योजनाएँ,प्रशासनिक कसावट, मजबूत लोक सेवाओं की निगरानी व्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर उनका विशेष ध्यान रहा है।

साय की पहचान एक सौम्य मगर एक सख्त प्रशासक की है। वे बोलते कम हैं लेकिन निर्णय दृढ़ता से लेते हैं। गांव की सादगी और राष्ट्रीय राजनीति का अनुभव दोनों ही उनकी कार्यशैली में झलकती हैं। यही संतुलन उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाता है।
विष्णुदेव साय की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक चेतना से परिपूर्ण रही है। उनके दादा स्वर्गीय बुधनाथ साय और बड़े पिताजी नरहरि प्रसाद साय जैसे जनप्रतिनिधियों की विरासत ने उन्हें सेवा और राजनीति का संस्कार दिया। लेकिन विष्णुदेव साय ने कभी भी अपनी पारिवारिक पहचान पर निर्भरता नहीं दिखाई बल्कि अपनी अलग पहचान बनाई।
आज जब प्रदेश उनका जन्मदिन मना रहा हैं, तब यह अवसर केवल शुभकामनाओं का नहीं बल्कि विष्णुदेव साय के संकल्पों को बार-बार स्मरण करने का भी है। छत्तीसगढ़ की जनता अपने न्यायप्रिय मुखिया से विकास, शांति और समृद्धि की अपेक्षा रखती है। प्रदेश की युवा पीढ़ी को भी उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर सीमित संसाधनों से ऊंचे लक्ष्य को हासिल करने के विषय मे विचार करना चाहिए।

विष्णुदेव साय का जीवन इस तथ्य का जीवंत प्रमाण है कि नेतृत्व, केवल पद प्राप्त करना नहीं बल्कि जनविश्वास अर्जित करना होता है। साथ ही सरपंच से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर लोकतंत्र की उस महान शक्ति को प्रदर्शित करता है जिसमें जनता अपने प्रतिनिधि को साधारण पृष्ठभूमि से उठाकर किसी सर्वोच्च पद तक पहुँचा सकती है।

उनके जन्मदिन पर उनसे यह भी अपेक्षा है कि वे प्रदेश को विकास, सामाजिक समरसता और सुशासन की नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। कामना की जा रही है कि धरतीपुत्र विष्णुदेव का हर संकल्प और भी सशक्त होता रहे। उनके कुशल नेतृत्व और दिशा निर्देश मे छत्तीसगढ़ नई उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ता रहे- इन्हीं अपेक्षाओं के साथ राज्य के यशस्वी, ओजस्वी और दूरदर्शी मुख्यमंत्री को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ / लल्लूराम डॉट कॉम


