भुवनेश्वर: राज्यसभा चुनाव के लिए कल से नॉमिनेशन प्रोसेस शुरू हो रहा है, लेकिन किसी भी पार्टी ने अपने प्रार्थी के नाम साफ नहीं किए हैं। एक तरफ राज्यसभा की रेस में चेहरों को लेकर खूब चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ तीनों बड़ी पार्टियों को बंटवारे का डर सता रहा है। चाहे BJD और कांग्रेस हों, जिनमें उथल-पुथल मची हुई है, या BJP, जो जमीनी लेवल पर अपना ऑर्गनाइजेशन नहीं बना पा रही है, तीनों ही पार्टियां आने वाले म्युनिसिपल और पंचायत चुनावों को देखते हुए अपने कैंडिडेट्स पर सोच-विचार कर रही हैं।

एक तरफ चौथी राज्यसभा सीट को लेकर खूब चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर ही अंदर घमासान मचा हुआ है। पार्टी हाईकमान किस पर मेहरबान होगा और कौन सीट जीतेगा, इस पर डिटेल में चर्चा हो रही है। सब आशावादी प्रार्थी अपने समर्थकों के साथ जुड़ने में व्यस्त हैं। बीजद की राज्यसभा रेस पर एक नजर डालें तो शंख पार्टी में नवीन के पॉलिटिकल एडवाइजर संतृप्त मिश्रा और कई सीनियर नेताओं के नाम चर्चा में हैं। लिस्ट में देवी मिश्रा, प्रताप जेना, संजय दासबर्मा, अतनु सब्यसाची नायक शामिल हैं। ऐसे में चर्चा है कि अगर किसी को राज्यसभा भेजा भी गया तो दूसरे ग्रुप बगावत कर सकते हैं।

रूलिंग पार्टी में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। पावर में होने की वजह से कैंडिडेट्स की संख्या काफी ज्यादा है। मनमोहन सामल, समीर मोहंती, गोलक महापात्रा और प्रकाश मिश्रा जैसे दिग्गजों के नाम राज्यसभा के लिए चर्चा में हैं। इनमें से बीजेपी ओडिशा से केंद्र के चेहरे के तौर पर विजय पाल सिंह तोमर या किसी दूसरे टॉप लीडर को सीट दे सकती है। एक तरफ जहां बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का गणित नहीं टूट रहा है, वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि राज्यसभा के लिए अलग-अलग ग्रुप्स के बीच चल रही खींचतान रूलिंग पार्टी के लिए सिरदर्द बन रही है। इन सबके बीच कांग्रेस ने कहा है कि नंबर न होने पर भी हम कैंडिडेट उतारेंगे।