अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली. पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू जंक्शन से है. जहां जीआरपी की हीलाहवाली के चलते एक लाख 23 हजार की धोखाधड़ी का पीड़ित यात्री 26 दिनों तक जीआरपी थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. थक हार कर वह जनपद पुलिस की शरण में गया, जहां पुलिस अधीक्षक चन्दौली के आदेश पर मुग़लसराय कोतवाली में जीरो एफआईआर दर्ज हुआ, तब जाकर मामला जीआरपी थाने पहुंच पाया.
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दरअसल, घटना 28 जनवरी 2026 की है. जब आजमगढ़ जिले के मेहनाजपुर थानांतर्गत जमीन सकत गाव निवासी रविन्द्र यादव डीडीयू जंक्शन पर ट्रेन पकड़ने पहुंचे. 05610 दानापुर बंगलोर क्लोन एक्सप्रेस के बी5 कोच में उनकी टिकट थी. प्लेटफार्म नंबर 3 पर ट्रेन की प्रतीक्षा के दौरान रविन्द्र यादव का पर्स, मोबाइल औऱ सारा सामान चोरी हो गया. जिसके बाद उन्होंने चोरी की सूचना जीआरपी डीडीयू में दर्ज कराई. उसी दिन कुछ घंटे बाद उनके खाते से दो बार में 1 लाख 23 हजार 671 रुपये निकल गए. जानकारी होने पर वे पुनः इस धोखाधड़ी की शिकायत करने गए, लेकिन उन्हें जीआरपी द्वारा बरगलाया गया.
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वहीं जब मामला दर्ज नहीं हुआ तो थक हार कर रविन्द्र यादव ने जनपद पुलिस से न्याय की गुहार लगाई, जिसके बाद एसपी चन्दौली ने मुग़लसराय कोतवाली में जीरो एफआईआर दर्ज कराई. जिसके बाद मामला जीआरपी डीडीयू थाने पहुंच गया. बहरहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है, लेकिन इन सब के बीच सवाल जीरो एफआईआर दर्ज होना और 27 दिन के अंतराल पर खड़ा हो रहा है. सवाल डीडीयू जंक्शन पर तैनात जीआरपी पर भी खड़े होते हैं कि किन परिस्थितियों में जीरो एफआईआर की नौबत आई. अगर उन्होंने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया होता तो पीड़ित को 27 दिनों तक परेशान नहीं होना पड़ता और न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब न होता.
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