Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने गलती से कर्मचारी को जीपीएफ अकाउंट में जमा राशि से ज्यादा राशि देने और बाद में उस पर ब्याज की बसूली को गलत माना है। अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि वह केवल मूल राशि ही वापस ले और ब्याज नहीं देने पर उसके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करे।

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश नवल किशोर सैनी की याचिका पर दिए। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने गलती से याचिकाकर्ता के जीपीएफ अकाउंट में जमा राशि से ज्यादा राशि दी है। यह गलती विभाग ने की है न कि याचिकाकर्ता की।

याचिका में बताया की साल 2015 में याचिकाकर्ता ने खुद के जीपीएफ खाते में जमा 75 फीसदी राशि लेने के लिए विभाग में आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उसे 15.75 लाख रुपए का भुगतान कर दिया, जबकि उसके खाते में 6,49,558 रुपए ही थे। इस दौरान वह 2018 में रिटायर हो गया।

तब विभाग ने 30 मई 2018 याचिकाकर्ता को सूचित किया कि उसे जीपीएफ खाते में जमा से ज्यादा राशि भुगतान कर दिया गया है। इसलिए वह 10.88 लाख रुपए भुगतान करे। हालांकि डिमांड राशि को बाद में संशोधित कर 8.78 रुपए कर दिया, लेकिन इसमें ब्याज राशि जोड़ दी गई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि जीपीएफ में जमा राशि से ज्यादा राशि की मंजूरी विभाग ने दी थी।

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